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- ...ाप्त हुए। जैन मान्यतानुसार प्रत्येक मोक्ष प्राप्त आत्मसिद्ध कहलाता है। जैन रामायण में भगवान राम का आदर के साथ उल्लेख किया गया है। ...२ KB (११ शब्द) - १२:१०, २४ मई २०२१
- ...[[सामाजिक स्तरीकरण]] का उपकरण है जो [[सामाजिक समूह]] में किसी इकाई को खास स्थान और महत्व प्रदान किए जाने की स्थिति व्यक्त करता है। इसके दो मूल आधार माने गए संस्कृत साहित्य में प्रतिष्ठा के संबंध में रामायण, महाभारत आदि महाख्यानों से लेकर नीतिग्रंथों औ्र शास्त्रों में विभिन्न तरह क ...२ KB (४ शब्द) - ०३:३७, ३ फ़रवरी २०१७
- ...ि]] में इसके [[सुन्दरकाण्ड|सुन्दर काण्ड]] का पाठ पूरे नौ दिन किया जाता है। रामायण मण्डलों द्वारा मंगलवार और शनिवार को इसके सुन्दरकाण्ड का पाठ किया जाता है। ...ी श्रीहरि नारायण भगवान के अवतार है जबकि [[वाल्मीकि|महर्षि वाल्मीकि]] कृत [[रामायण]] में [[राम|श्री राम]] को एक आदर्श चरित्र मानव के रूप में दिखाया गया है। जो ...१७ KB (४५ शब्द) - १४:३९, १७ मई २०२१
- ...ी]] है जो इसमें उत्तर प्रदेश के [[देवरिया जिला|देवरिया जिले]] के बरहज नामक स्थान पर मिलती है। इस क्षेत्र का प्रमुख नगर गोरखपुर इसी राप्ती नदी के तट पर स्थित ...्यंत घाघरा या गोगरा के नाम से प्रदर्शित करते रहे हैं किन्तु परम्परा में और स्थानीय लोगों द्वारा इसे सरयू (या सरजू) कहा जाता है। इसके अन्य नाम देविका, रामप्र ...१४ KB (४९२ शब्द) - ११:१६, ६ मई २०२१
- ...पत्नी आदिति के पुत्र हैं और जल के देवता हैं । प्राचीन वैदिक धर्म में उनका स्थान बहुत ही महत्त्वपूर्ण था पर वेदों में उसका रूप इतना अमूर्त हैं कि उसका प्राक ...३ KB (५ शब्द) - १२:४५, १ अगस्त २०२१
- ...ि]] में इसके [[सुन्दरकाण्ड|सुन्दर काण्ड]] का पाठ पूरे नौ दिन किया जाता है। रामायण मण्डलों द्वारा मंगलवार और शनिवार को इसके सुन्दरकाण्ड का पाठ किया जाता है। ...्वामी हरि नारायण भगवान के अवतार है जबकि [[वाल्मीकि|महर्षि वाल्मीकि]] कृत [[रामायण]] में [[राम]] को एक आदर्श चरित्र मानव के रूप में दिखाया गया है। जो सम्पूर्ण ...२५ KB (३०३ शब्द) - १४:१९, १७ अगस्त २०२१
- इसके श्लोक [[अनुष्टुप छंद]] में हैं - इसी छंद में गीता, [[वाल्मीकि रामायण]] और [[मनुस्मृति]] लिखी गई है। इसी विषय (यानि धर्मशास्त्र ) पर मनुस्मृति को ...्ञवल्क्य स्मृति में भी प्राचीन सामग्री का उपयोग करते हुए नयी सामग्री को भी स्थान दिया गया। [[अर्थशास्त्र (ग्रन्थ)|कौटिल्य अर्थशास्त्र]] की सामग्री से भी [[य ...७ KB (६३ शब्द) - २१:३२, १ मार्च २०२०
- ...हे थे। सन् १९४६ में [[लंदन]] चेंबर ऑफ कॉमर्स की परीक्षा में उन्होंने प्रथम स्थान प्राप्त किया था। १९५६ में पुणे के बी॰ जे॰ मेडिकल कॉलेज से उन्होंने एम॰बी॰बी ...Bird (India) Limited, Pune, First Edition-2008, p.290-300.</ref> वाल्मीकीय रामायण में उल्लिखित ग्रहस्थिति के अनुसार भगवान [[राम]] की वास्तविक जन्म-तिथि ४ दिस ...१५ KB (२९१ शब्द) - ०७:२९, २७ अप्रैल २०१९
- ...[[चित्रकूट धाम|चित्रकूट]], [[लंका]] आदि अलग-अलग स्थान बना दिए गए थे और एक स्थान पर उसी से संबंधित सब लीलाएँ दिखाई जाती थीं। यह ज्ञातव्य है कि रंगशाला खुली ...भी पूरा ध्यान रखता है। रामलीला के प्रांरभ में एक निश्चित विधि स्वीकृत है। स्थान-काल-भेद के कारण विधियों में अंतर लक्षित होता है। कहीं भगवान के मुकुटों के प ...२१ KB (१५० शब्द) - १९:०२, १५ जून २०२०
- ...महिमा को पहुँचाया। उनकी अन्य रचनाएँ - विनय पत्रिका, दोहावली, गीतावली, बरवै रामायण एक ज्योतिष ग्रन्थ रामाज्ञा प्रश्नावली का भी निर्माण किया। ...अनुरूप दो अलग अलग परंपरा चलायी जय हरी वैष्णव धर्म के अंदर भक्ति का प्रमुख स्थान है। ...७ KB (१३७ शब्द) - १३:३३, १६ जून २०२१
- ...-देवताओं से लेकर स्त्री-पुरुषों तथा सभी वर्गों के लिये नृत्य का महत्वपूर्ण स्थान था। सामवेद की रचना ऋग्वेद के पाठ्य अंशों को गाने के लिये की गई अत- यह वेद ग नृत्यकला के विकास में अन्य वेदों की तरह 'अथर्ववेद' का भी महत्वपूर्ण स्थान है। इसके अध्ययन से नृत्य संबंधी सामग्री प्रचुरता से मिलती है। इसमें नृत्यकल ...१९ KB (११४ शब्द) - ०९:२५, ६ मई २०२१
- ...ेद]] और [[आयुर्वेद]] किंतु कुछ मान्यता [[अथर्ववेद]] की जगह [[शिल्पवेद]] को स्थान देते हैं। ...तिहास है। [[वैदिक काल]] में घटी दो सबसे बड़ी घटनाओं को महाकाव्य [[वाल्मीकि रामायण]] और [[महाभारत]] में लिखा है। ...८ KB (८ शब्द) - १६:००, ३० मई २०२१
- ...आदि काव्यशास्त्रियों ने इसे इसकी निबद्धता के चलते काव्य शृंखला में अन्तिम स्थान दिया है पुनरपि कोई भी इससे मुंह नहीं मोड़ पाया है। [[अभिनवगुप्त]] का तो यह '''[[हेमचंद्राचार्य]]''' ने मुक्तक शब्द के स्थान पर 'मुक्तकादि' शब्द का प्रयोग किया। उन्होंने उसका लक्षण दण्डी की परम्परा मे ...१६ KB (१०२ शब्द) - ०६:२७, १६ मई २०२१
- B. भुवर्लोक : पृथ्वी और सूर्य के बीच के स्थान को भुवर्लोक कहते हैं। इसमें सभी ग्रह-नक्षत्रों का मंडल है। रामायण में भी अहिरावण द्वारा राम-लक्ष्मण का हरण कर पाताल लोक ले जाने पर श्री हनुमा ...११ KB (२२ शब्द) - ०८:१७, १ जुलाई २०२१
- ...े घर संवत् 1489 में हुआ। इनके पिता गोविंदागिरि रंगपुर जिले के वांडुका नामक स्थान में रहकर राजा का कार्य करते थे। यहीं से व्यापार के लिये वे पूर्व असम की ओर माधव ने [[भक्तिरत्नावली]] और [[आदिकांड रामायण]] का रूपान्तर असमिया छन्दो में किया तथा '''नामघोषा''' की रचना की। उन्होंने ...७ KB (१२३ शब्द) - ००:४६, १४ जून २०२१
- ...बनाया था। श्रावस्ती [[बौद्ध धर्म|बौद्ध]] व [[जैन धर्म|जैन]] दोनों का तीर्थ स्थान है। [[तथागत]] दीर्घ काल तक श्रावस्ती में रहे थे। यहाँ के श्रेष्ठी अनाथपिण्ड माना गया है कि श्रावस्ती के स्थान पर आज आधुनिक सहेत महेत ग्राम है जो एक दूसरे से लगभग डेढ़ फर्लांग के अंतर पर ...२९ KB (७२ शब्द) - १७:०१, २३ जुलाई २०२१
- ...वाराणसी, संस्करण-२०१४, पृष्ठ-८६ एवं ८९ तथा पृ०-५७०.</ref> भी कहा जाता है। रामायण के छः अध्याय हैं जो [[काण्ड]] के नाम से जाने जाते हैं, इसके २४,००० [[श्लोक] ...bharata’ come to be (and what has ‘dharma’ got to do with it)?}}</ref> अतः रामायण [[गौतम बुद्ध]] के काल के पूर्व का होना चाहिये। भाषा-शैली से भी यह [[पाणिनि] ...५९ KB (४२१ शब्द) - १६:२४, २५ अगस्त २०२१
- दूनागिरी की पहचान का तीसरा महत्वपूर्ण लक्षण रामायण व रामलीला में लक्ष्मण-शक्ति का कथा प्रसंग है। ...भी पर्वत पर घूमने पर हमें विभिन्न प्रकार की वनस्पतियॉं दिखायी देती हैं, जो स्थानीय लोगों की पहचान में भी नहीं आती हैं। ...२० KB (२२० शब्द) - ०५:१४, २८ सितम्बर २०२०
- ...रूपण महाकाव्य के स्वरूप की वैज्ञानिक एवं क्रमबद्ध परिभाषा प्रस्तुत करने के स्थान पर उसकी प्रमुख और गौण विशेषताओं का क्रमहीन विवरण उपस्थित करता है। इसके आधार ...में आख्यान, देवस्तुति, भावप्रधनता इत्यादि आते हैं। वीरमहाकाव्य के अन्तर्गत रामायण, महाभारत एवं आाख्यान तत्त्वों की प्रधनता आती है। लौकिक महाकाव्य में कालिदास ...४० KB (२१३ शब्द) - १०:१५, ६ मई २०२१
- ...ग्रंथों - वेदों और रामायण तथा महाभारत जैसे महाकाव्यों और पुराणों में भी इस स्थान को 'प्रयाग' कहे जाने के साक्ष्य मिलते हैं। उत्तर भारत में जलमार्ग के द्वारा ...ा मैदान में यह जुलूस समाप्त हो जाता है। मुख्य अतिथि सहित इस मेले का उदघाटन स्थानीय कण्डार देवता एवं हरि महाराज ढ़ोल द्वारा होता है। सप्ताह भर का उत्सव अपने ...९ KB (१४८ शब्द) - १६:२२, १५ जून २०२०