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- [[चित्र:Common law world.png|thumb|230px|विश्व में साधारण कानून प्रणालियों वाले देश]] ...गया है, तो इसमें सुनाया गया निर्णय आने वाले ऐसे मामलों के लिए भी निर्णायक कानून का रूप धारण कर लेता है। ...४ KB (५४ शब्द) - २०:५०, १५ जून २०२०
- * अज्ञात राशि एवं उसका मान निकालना * [[मूल (संख्या का)|करणी]] एवं करणियों का मान निकालना ...४ KB (६६ शब्द) - १२:५६, १५ जून २०२०
- ...ैं। मुख्य विशेषता यह है कि उसका प्रतिकार क्षतिपूर्ति के द्वारा संभव हो तथा कारावास भेजने की आवश्यकता न हो। (१) अपक्र्त्य् किसी व्यक्ति के अधिकार का अतिक्रमण अथवा उसके प्रति किसी अन्य व्यक्ति के कर्तव्य का उल्लंघन हैं; ...९ KB (५५ शब्द) - ०५:४७, १६ जून २०२०
- ...िया। उनके शिष्यों ने जो जिन मंदिर बनवाए वे विधि चैत्य कहलाए। यही विधि पक्ष कालांतर में खरतरगच्छ कहा जाने लगा और यही नाम आज भी प्रचलित है। इस गच्छ में अनेक गंभीर एवं प्रभावशाली आचार्य हुए हैं। उन्होंने भाषा, साहित्य, इतिहास, दर्शन, ज्योतिष, वैद्यक आदि विषयों पर संस्कृत, प्राकृत अपभ्रंश एवं देश भाषा ...३ KB (३ शब्द) - १३:२८, १५ मार्च २०२०
- ...प्राचीन [[काव्यशास्त्र]], जिसमें [[रस (काव्य शास्त्र)|रसों]], [[अलंकार|अलंकारों]] रीतियों आदि पर विचार किया जाता था, भी साहित्यशास्त्र है। ...://pandyamasters.blogspot.in/2012/08/blog-post_1355.html साहित्यशास्त्र के इतिहास] ...२ KB (७४ शब्द) - १०:२८, ६ मई २०२१
- '''निजी अंतर्राष्ट्रीय कानून''' (Private international law) से तात्पर्य उन नियमों से है जो किसी राज्य ...सा है नहीं। '''निजी अंतर्राष्ट्रीय कानून''' और '''सार्वजनिक अंतर्राष्ट्रीय कानून''' (Public international law) में किसी प्रकार की पारस्परिकता नहीं है। ...११ KB (२८ शब्द) - ०९:५८, ३ मार्च २०२०
- '''सभ्यता''' शब्द का प्रयोग मानव समाज के एक सकारात्मक, प्रगतिशील और समावेशी विकास को इंगित करने के लिये किया जाता है। सभ्य समाज अक्सर उन्नत कृषि, लंबी दूरी [[श्रेणी:सांस्कृतिक इतिहास]] ...२ KB (२५ शब्द) - १५:५९, ९ मई २०२०
- महत्तम समापवर्तक (HCF) निकालने के लिए यूक्लिड के अल्गोरिद्म का फ्लोचार्ट]] [[गणित]], [[अभिकलन|संगणन]] तथा अन्य विधाओं में किसी कार्य को करने के लिये आवश्यक चरणों के समूह को '''कलन विधि''' (अल्गोरिद्म) कहते ...१० KB (२५२ शब्द) - १४:११, २ अगस्त २०२१
- निम्नलिखित समीकरण के मूल निकालिए- == इतिहास == ...८ KB (३३४ शब्द) - १६:२६, ७ जुलाई २०२१
- == इतिहास == ...के दशक में मूल एबीसी को ध्वस्त कर दिया गया और त्याग दिया गया, देर से आविष्कारकों को श्रद्धांजलि दी गई, एबीसी की प्रतिकृति 1 99 7 में हुई थी, जहां उसने श ...९ KB (१०६ शब्द) - २३:२२, १५ जून २०२०
- ...ीय कानून किसी देश के अपने कानून से इस अर्थ में भिन्न है कि अन्तर्राष्ट्रीय कानून दो देशों के सम्बन्धों के लिए लागू होता है न कि दो या अधिक नागरिकों के बी == अंतर्राष्ट्रीय कानून - निजी तथा सार्वजनिक == ...२१ KB (५२ शब्द) - २२:००, १९ अगस्त २०२१
- ...िया। उनके शिष्यों ने जो जिन मंदिर बनवाए वे विधि चैत्य कहलाए। यही विधि पक्ष कालांतर में खरतरगच्छ कहा जाने लगा और यही नाम आज भी प्रचलित है। ...नेक गंभीर एवं प्रभावशाली आचार्य हुए हैं। उन्होंने [[भाषा]], [[साहित्य]], [[इतिहास]], [[दर्शनशास्त्र|दर्शन]], [[ज्योतिष]], [[आयुर्वेद|वैद्यक]] आदि विषयों पर [ ...४ KB (२ शब्द) - १५:०६, २३ अगस्त २०२०
- == इतिहास == ...ी विशेष भाषा-युग्म के लिये नहीं बनाये जाते। अतः किसी भी भाषा-युग्म के लिये काम करेगा। ...४ KB (१२३ शब्द) - ००:१७, १६ जून २०२०
- ...सी प्रकार उचित प्रतिनिधित्वयुक्त विधानमंडल के अभाव के कारण जनमत के विरुद्ध विधिनिर्माण होता रहा जिसका अंत विद्रोह और विप्लव में हुआ। इन दृष्टांतों से सिद्ध ...सका कारण केवल भारतीय जनसाधारण की अक्रियात्मक सुप्त मनोदशा है। यहाँ पुन: इन विधियों के मूल में देश का नहीं युग के जनमत का बल स्पष्ट है। ...१५ KB (७ शब्द) - ००:२२, १७ फ़रवरी २०१३
- ...धारित है। जब वर्तमान राष्ट्रकुल देशों में ब्रितानी साम्राज्य था, उस समय ये कानून इन देशों में लागू किये गये और अब तक चल रहे हैं। ...योग दिया। कानून की इस परंपरा की इति डेनो राजा कैन्यूट के काल में हुई जिसकी कानून का विशद एवं विस्तृत संग्रह प्रस्तुत करने का श्रेय प्राप्त है। ...१३ KB (२४ शब्द) - २२:४९, २९ फ़रवरी २०२०
- ...ी में जुडीशल प्रीसीडेट कहते हैं) द्वारा होना माना गया है। अत: स्पष्ट है कि विधिनियमों का संहिताकरण होने के पूर्व यह तीनों स्तर पार किए जा चुके होंगे। == विधिनियमों को लिपिबद्ध करने की आवश्यकता == ...१८ KB (१५ शब्द) - २१:२४, ५ मार्च २०२०
- ...अदालत या कोर्ट) का तात्पर्य सामान्यतः उस स्थान से है जहाँ पर न्याय प्रशासन कार्य होता है, परंतु बहुधा इसका प्रयोग न्यायाधीश के अर्थ में भी होता है। बोलचा == भारत में न्यायालय का इतिहास == ...६ KB (५७ शब्द) - १९:४२, ९ जुलाई २०२०
- |name= पांडुरंग वामन काणे|image = PV Kane.jpg '''पांडुरंग वामन काणे''' (७ मई १८८०, दापोली, [[रत्नागिरि]] - १९७२) [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] के ...७ KB (१४६ शब्द) - १२:२१, ४ अक्टूबर २०२०
- '''अनिवार्य मतदान''' का अर्थ है कि [[विधि|कानून]] के अनुसार किसी [[चुनाव]] में मतदाता को अपना मत देना या मतदान केन्द्र प * [[मताधिकारी]] ...३ KB (१८९ शब्द) - १०:३३, ६ मई २०२१
- ...ाने और ठीक ठीक तर्क स्थापित करने के हेतु ही मुख्यत: जीवसांख्यिकी विधि का विकास हुआ है। == इतिहास == ...१४ KB (२३७ शब्द) - ०३:४०, १५ जून २०२०