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देखें (पिछले २० | ) (२० | ५० | १०० | २५० | ५००)
  • ''' साहित्य का समाजशास्त्र ''' साहित्य और समाज के संबंधों का अध्ययन करने वाला शास्त्र है। <ref>{{cite book |last1= ...स रहा है कि मार्क्सवादी समाजशास्त्र को भी इसी में सम्मिलित कर लिया जाए। यह साहित्य की का अध्ययन और मूल्यांकन की एक शाखा है। ...
    २ KB (१८ शब्द) - २२:१५, १ अगस्त २०२१
  • ...व्य|पद्य]] के रूप में लिखे गये सम्पूर्ण साहित्य के विकास के इतिहास से है। साहित्य के अन्तर्गत वह सब कुछ आ जाता है जो पाठकों/श्रोताओं/दर्शकों को मनोरंजन प्रदा ==साहित्येतिहास लेखन== ...
    २ KB (६ शब्द) - १०:२९, ६ मई २०२१
  • ...ययन करने के लिए इस सभी सामग्री को दो भागों में बाँटा जा सकता है- [[साहित्य|साहित्यिक]] तथा [[पुरातत्वशास्त्र|पुरातात्विक]]। ...ें ऐतिहासिक, अर्ध ऐतिहासिक, विदेशी विवरण, जीवनियाँ, कल्पना प्रधान तथा गल्प साहित्य आते हैं। पुरातात्विक सामग्रियों में अभिलेख, प्राचीन स्मारक और मुद्राएँ आते ...
    २ KB (२६ शब्द) - १३:२७, ४ जुलाई २०२१
  • ...द्धान्त''' (Literary theory) [[साहित्य]] की प्रकृति का क्रमबद्ध अध्ययन एवं साहित्य के विश्लेषण की विधि है। ...प्राचीन [[काव्यशास्त्र]], जिसमें [[रस (काव्य शास्त्र)|रसों]], [[अलंकार|अलंकारों]] रीतियों आदि पर विचार किया जाता था, भी साहित्यशास्त्र है। ...
    २ KB (७४ शब्द) - १०:२८, ६ मई २०२१
  • ...च्ची और सही जानकारी रखे। तभी रिपोर्ताज लेखक प्रभावोत्पादक ढंग से जनजीवन का इतिहास लिख सकता है। == इतिहास == ...
    ४ KB (१८ शब्द) - ०१:२३, ६ जुलाई २०२१
  • ...इतिहास|हिन्दी साहित्यकार]], [[आलोचना|आलोचक]] एवं [[इतिहासकार]] थे। हिन्दी साहित्य में बच्चन सिंह की ख्याति सैद्धान्तिक लेखन के क्षेत्र में असंदिग्ध है।<ref>[ ...ef>[http://article.wn.com/view/WNAT9d27e9d8b063992412670f4e45f1b73f/ हिंदी साहित्य के पुरोधा प्रो॰बच्चन सिंह नहीं रहे]</ref> ...
    ६ KB (१२३ शब्द) - २३:४३, १५ सितम्बर २०२०
  • ...ा कहा जाने लगा। इनकी प्रसिद्ध पुस्तक [[चर्यापद]] है।<ref>हिन्दी साहित्य का इतिहास, सम्पादक- [[डॉ॰ नगेन्द्र]], संस्करण १९८५, प्रकाशक- नेशनल पब्लिशिंग हाउस, २३ [[श्रेणी:बौद्ध साहित्य]] ...
    २ KB (१६ शब्द) - ०३:०२, ६ मार्च २०२०
  • ...ल संस्कृतिकर्मी और संगठक थे। उन्होंने भाषा और साहित्य के साथ-साथ सामाजिक विकास के लिए सांस्कृतिक आंदोलन भी चलाया। जुलाई 1990 को उनका देहांत हो गया। * पुरखा झारखंडी साहित्यकार और नये साक्षात्कार: वंदना टेटे (सं), प्यारा करेकेट्टा फाउंडेशन, रांची 2012 ...
    २ KB (३ शब्द) - ०८:४७, २८ जनवरी २०१७
  • ...[[सृजन प्रक्रिया]] से सीधा संबंध माना गया है। [[कला|कलात्मक]] और [[साहित्य|साहित्यिक]] रचनाएं युगबोध से निर्मित होती हैं तथा उसका प्रकटन भी करती हैं। == युगबोध और साहित्य == ...
    ३ KB (४९ शब्द) - १८:०२, १५ जून २०२०
  • ...[[लघुकथा|लघुकथाएँ]], और [[नाटक]] शामिल हैं। कपोलकल्पना को कभी-कभी किसी भी "साहित्यिक कथा" का अर्थ देने के लिए इसकी सबसे कम समझ में उपयोग किया जाता है। कपोलकल्पना साहित्य की वह शाखा है जिसमें कथाओं में दर्शाए गए स्थान, व्यक्ति, घटनाएँ और सन्दर्भ ...
    ५ KB (१२६ शब्द) - ०७:२७, १० अक्टूबर २०२०
  • * आसान शब्दो में समझा जाए तो :• साहित्य समाज का एक आईना है जिसमे हम समाज को देखते है अर्थात् यह मानवीय जीवन का चित् ...ें मिलता है। इस दृष्टि से [[आदिवासी साहित्य]] सभी साहित्य का मूल स्रोत है। साहित्य - स+हित+य के योग से बना है ...
    ९ KB (३१६ शब्द) - १४:४२, १० जुलाई २०२१
  • ...विशिष्ट स्थान है।<ref>आचार्य, रामचंद्र शुक्ल “प्रकरण 4”, हिन्दी साहित्य का इतिहास (हिन्दी)। कमल प्रकाशन, नई दिल्ली, पृष्ठ सं. 107</ref> ...ृष्णदास पयहारी]], अग्रदास।<ref>{{cite book | title =हिंदी साहित्य का दूसरा इतिहास| author = बच्चन सिंह | authorlink = | publisher = राजकमल प्रकाशन | edition ...
    ४ KB (११५ शब्द) - ०५:२३, १६ जून २०२०
  • [[चित्र:Pushkinsky dom.jpg|right|thumb|300px|सेंट पिट्सबर्ग स्थित '''रूसी साहित्य संस्थान''']] ...में रचित [[साहित्य]] के अलावा [[रूसी भाषा]] में रचित उन अनेकों देशों के [[साहित्य]] से है जो ...
    ९ KB (२५९ शब्द) - १०:२०, ६ मई २०२१
  • ...ंभ से उन्नीसवीं शती के अंत तक इनका आलेखन होता रहा। बुरंजी राष्ट्रीय असमिया साहित्य का अभिन्न अंग हैं। गदाधर सिंह के राजत्वकाल में पुरनि असम बुरंजी का निर्माण ...्ध हैं। इन बुरंजी ग्रंथों के अतिरिक्त राजवंशों की विस्तृत वंशावलियाँ भी इस काल में हुई। ...
    ६ KB (११ शब्द) - ००:१७, ५ मार्च २०२०
  • ...ं [[दर्शन का इतिहास]], [[विज्ञान का इतिहास]] और [[साहित्येतिहास|साहित्य का इतिहास]] बहुत उपयोगी हैं। == इतिहास == ...
    ४ KB (७४ शब्द) - १३:२९, ४ मई २०२१
  • '''शिवसिंह सेंगर''' (संवत् 1890-1935 वि.) [[हिन्दी]] के इतिहास लेखक थे। ...हित्य|हिन्दी साहित्य]] में उनकी अपार निष्ठा थी। उनका निजी पुस्तकालय हिन्दी साहित्य की पुस्तकों से भरा था। जब बहुत सारी पुस्तकें जमा हो गईं तो उनके मन में आया ...
    ७ KB (२५ शब्द) - २२:५६, १५ जून २०२०
  • |name= पांडुरंग वामन काणे|image = PV Kane.jpg '''पांडुरंग वामन काणे''' (७ मई १८८०, दापोली, [[रत्नागिरि]] - १९७२) [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] के ...
    ७ KB (१४६ शब्द) - १२:२१, ४ अक्टूबर २०२०
  • ...होती है। वैसे ही है जैसे जीवविज्ञान में जीवों का वर्गीकरण किया जाता है। [[साहित्य]] एवं भाषण में '''विधा''' शब्द का प्रयोग एक वर्गकारक (CATEGORIZER) के रूप म == साहित्य की विधाएँ == ...
    ७ KB (११४ शब्द) - ०७:५४, १४ अगस्त २०२०
  • == प्राचीन काल में भारत में शर्करा का उपयोग == ...त्पत्ति [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] से मानी जाती है, और [[भारत]] का [[संस्कृत साहित्य]], 1500 से [[ईसा]] पूर्व के बीच लिखा गया है। ...
    ९०२ बाइट (२ शब्द) - २१:३९, २१ अप्रैल २०१९
  • [[चित्र:SteacieLibrary.jpg|अंगूठाकार|लैइब्ररी]] ...ाशन दिल्ली ISBN 978-0-391-02358-1]</ref>। पंडित रेऊ लिखित ''[[मारवाड़]] का इतिहास'' सुप्रसिद्ध है<ref>[[दशरथ शर्मा]] (१९७०) ''लेक्चर्स ऑन राजपूत हिस्टरी एंड ...
    ६ KB (१६२ शब्द) - १२:५१, १५ जून २०२०
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