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"सूर्य देव" के परिणाम खोजें - भारतपीडिया

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देखें (पिछले २० | ) (२० | ५० | १०० | २५० | ५००)
  • ...गरुड़]] हैं, जो कि पक्षियों के राजा हैं। अरुण को [[सूर्य देवता|भगवान सूर्य देव]] का [[सारथी]] माना जाता है। [[रामायण]] में प्रसिद्ध [[सम्पाती]] और [[जटायु ...
    ८१० बाइट (२ शब्द) - ०१:४६, १३ अगस्त २०२१
  • == सूर्य के ग्रहों का परिक्रमण काल == | [[वरुण (देव)|वरुण]] || 164.8 ...
    १ KB (१८ शब्द) - १६:३४, २९ फ़रवरी २०२०
  • * अगर पृथ्वी से चलें तो [[सूर्य|सूरज]] के गुरुत्वाकर्षक क्षेत्र से निकलने के लिए पलायन वेग '''४२.१''' किलोम | [[सूर्य]] || [[सूर्य]] || align="right" | 617.5 ...
    ६ KB (११० शब्द) - १७:०५, २५ जुलाई २०२१
  • | कुमुद || [[सूर्य]] || नैरृत | अंजन || [[वरुण (देव)|वरुण]] || पश्चिम ...
    १ KB (२५ शब्द) - ०५:१२, ४ मार्च २०२०
  • ...्न हुऐ थे और इनकी गणना बारह आदित्यों में की जाती है इसको [[सूर्य]]<nowiki/>देव के नाम से भी जाना जाता है {{cn}} 33 कोटि (प्रकार) देवी देवताओं में १२ आदित्य हैं ,जो इस प्रकार हैं- ...
    १ KB (३१ शब्द) - १७:२९, १२ अगस्त २०२१
  • ...विहित हैं। पदक्षिणा का यह नियम अधिक प्रचलित है कि [[गणेश]] के लिये एक बार, सूर्य के लिये दो बार, शिव के लिये तीन बार, विष्णु के लिये चार बार और अश्वत्थ वृक् ...
    ३ KB (२० शब्द) - १०:४८, १५ जून २०२०
  • ...्रताप सूर्य अथवा गुरु नानक प्रकाश (सन् 1823) : इसमें [[गुरु नानक|गुरु नानक देव]] का जीवनचरित् उल्लिखित है। *(3) [[जपजी साहिब|जपुजी]] : गरब गजिनी टीका (सन् 1829) : गुरु नानक देव की रचना की टीका है जिसमें पूर्ववर्ती टीकाओं का खंडन-मंडन भी है। लेखक स्वयं ...
    ५ KB (२० शब्द) - १४:०६, १५ जून २०२०
  • ...ा सींग) भी धारण करती थी। फ़िली, बेहबेत आदि मिस्री नगरों के विशाल मंदिर इसी देवी ईसिस की मूर्तियों की प्रतिष्ठा के लिए बने थे। ...से भी उस देश के धार्मिक इतिहास में ईसिस का जितना प्रभुत्व रहा है उतना अन्य देवियों का दूसरे देशों में नहीं रहा। ...
    ३ KB (१२ शब्द) - २०:३०, ४ नवम्बर २०१८
  • ...यदेव|सूर्य]], (5) पश्चिम के [[वरुण (देव)|वरुण]], (6) पश्चिमोत्तर के [[वायु देव|वायु]], (7) उत्तर के [[कुबेर]] और (8) उत्तरपूर्व के [[सोम]]। (कुछ पुराणों म ...
    ४ KB (२ शब्द) - १९:०७, १९ जनवरी २०२१
  • ...पुत्रों और [[यमुना]] (नदी) नामक एक पुत्री को जन्म दिया। यही विवस्वान यानि सूर्य के पुत्र वैवस्वत मनु कहलाये। ...त्स्य अवतार]] हुआ। इनकी शासन व्यवस्था में देवों में पाँच तरह के विभाजन थे: देव, दानव, यक्ष, किन्नर और गंधर्व। इनके के दस पुत्र हुए थे। इल, इक्ष्वाकु, कुशन ...
    १० KB (४४ शब्द) - ०१:२५, २३ जुलाई २०२१
  • ...र दिये ही वहाँ से उठ कर चला गया। सत्राजित ने स्यमन्तक मणि को अपने घर के एक देव मन्दिर में स्थापित कर दिया। वह मणि नित्य उसे आठ भार सोना देती थी। जिस स्थान ...महामाया [[दुर्गा]] की उपासना करने लगे। उनकी उपासना से प्रसन्न होकर दुर्गा देवी ने प्रकट होकर उन्हें आशीर्वाद दिया कि तुम्हारा पुत्र तुम्हें अवश्य मिलेगा। ...
    ११ KB (१२ शब्द) - ११:२९, १६ जून २०२०
  • ...त्यां-जगत…’’ से लेकर अठारहवें मंत्र ‘‘अग्ने नय सुपथा राये अस्मान् विध्वानि देव वयुनानि विद्वान्…’’ तक शब्द-शब्द में मानों ब्रह्म-वर्णन, उपासना, प्रार्थना ...]’ नामक लोक की बात आती है — असुर्या मतलब कि सूर्य से रहित लोक। वह लोक जहाँ सूर्य नहीं पहुँच पाता, घने, काले अंधकार से भरा हुआ अन्चतम लोक, अर्थात् गर्भलोक। ...
    ११ KB (२२७ शब्द) - १५:२०, २३ जून २०२१
  • | affiliation = [[ग्रह]], [[असुर]], [[देव]] ...वी की छाया परने से चंद्र ग्रहण लगता है, क्योंकि पूर्णिमा के समय चंद्रमा और सूर्य एक दुसरे के उलटी दिशा में होते हैं। ये तथ्य इस कथा का जन्मदाता बना कि "वक्र ...
    १३ KB (१९९ शब्द) - ००:५५, २८ अगस्त २०२१
  • ...युपरांत जीव जब सर्वोच्च स्वर्ग के मार्ग पर अग्रसर होता है तो निम्न कोटि के देव एवं शैतान बाधा उपस्थित करते हैं जिनसे छुटकारा तभी संभव है जब वह शैतानों के ...शक्तियों द्वारा मानते हैं जो उनपर शासन करती हैं। इन सात शक्तियों के स्रोत सूर्य, चंद्र और पांच नक्षत्र हैं। ...
    ६ KB (३ शब्द) - ०९:३१, ९ सितम्बर २०१४
  • [[चित्र:Suryatanjore.jpg|thumb|300px|शाकद्वीपीय ब्राह्मण सूर्यांश तथा सूर्योपासक थे। सूर्यदेव का चित्र।]] ...017 |url-status=dead }}</ref> इन्हें सूर्य के अंश से उत्पन्न होने के कारण सूर्य के समान प्रताप वाला ब्राह्मण माना जाता है। ...
    १९ KB (५६५ शब्द) - २१:१९, २१ जुलाई २०२१
  • ...ें सूर्य के जाने पर उन्हें उठाया जाता है। उस दिन को [[देव प्रबोधिनी एकादशी|देवोत्थानी एकादशी]] कहा जाता है। इस बीच के अंतराल को ही चातुर्मास कहा गया है। ...कार के कीटाणु अर्थात सूक्ष्म रोग जंतु उत्पन्न हो जाते हैं, जल की बहुलता और सूर्य-तेज का भूमि पर अति अल्प प्राप्त होना ही इनका कारण है। ...
    २० KB (१२५ शब्द) - २२:०५, २१ जुलाई २०२१
  • ...कहा कि वेदों में तेरह अक्षर वाले छंद अति छंद कहलाते हैं और अग्नि, वायु तथा सूर्य तीनों तेरह दिन वाले यज्ञ में व्याप्त होते हैं। ...अतएव इसे भी जल में डुबो दिया जाये। तब बंदी बोला कि हे महाराज! मैं [[वरुण (देव)|वरुण]] का पुत्र हूँ और मैंने सारे हारे हुये ब्राह्मणों को अपने पिता के पास ...
    १५ KB (३४ शब्द) - ०६:४४, १६ जून २०२०
  • (देवी/देवता) ~ [[हिन्दू देवी देवताओं की सूची]] ...ूजनीय/अमर है। देवता अथवा देव इस तरह के पुरुषों के लिये प्रयुक्त होता है और देवी इस तरह की स्त्रियों के लिये। [[हिन्दू धर्म]] में देवताओं को या तो [[परमेश् ...
    २२ KB (२२९ शब्द) - २१:०९, ३० जून २०२१
  • ...ी कृष्ण आखेट के लिये गये। जिस वन में वे शिकार के लिये गये थे वहाँ पर भगवान सूर्य की पुत्री [[कालिन्दी]], श्री कृष्ण को पति रूप में पाने की कामना से तप कर रह ...हि-त्राहि कर रहे हैं। वह भौमासुर भयंकर क्रूर तथा महा अहंकारी है और [[वरुण (देव)|वरुण]] का छत्र, [[अदिति]] के कुण्डल और देवताओं की मणि छीनकर वह त्रिलोक विज ...
    ८ KB (४३ शब्द) - ११:४१, ९ अगस्त २०२१
  • २०००० वरुण का नाम [[हिन्दू धर्म|हिन्दु धर्म]] के देवता [[वरुण (देव)|वरुण]] पर रखा गया था। २०००० वरुण [[सूर्य|सूरज]] से लगभग ४३ [[खगोलीय इकाई]]यों (यानि क़रीब ६ अरब किमी) की दूरी पर है, ...
    ७ KB (१७९ शब्द) - ०३:४८, १६ जून २०२०
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