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एसिडिटी (रोग)

भारतपीडिया से
अंगूठाकार बनाने में त्रुटि हुई: फ़ाइल गायब है
गैस्ट्रोइसोफेजियल रिफलक्स डिजीज

एसिडिटी को चिकित्सकीय भाषा में गैस्ट्रोइसोफेजियल रिफलक्स डिजीज (GERD) के नाम से जाना जाता है। आयुर्वेद में इसे 'अम्ल पित्त' कहते हैं। आमाशय के भित्ति में उपस्थित जठर ग्रंथियों के द्वारा जठराम्ल (हाइड्रोक्लोरिक अम्ल) का स्राव किया जाता है पाचन के लिए आवश्यक है।

कारण[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

आधुनिक विज्ञान के अनुसार आमाशय में पाचन क्रिया के लिए हाइड्रोक्लोरिक अम्ल तथा पेप्सिन का स्रवण होता है। सामान्य तौर पर यह अम्ल तथा पेप्सिन आमाशय में ही रहता है तथा भोजन नली के सम्पर्क में नहीं आता है। आमाशय तथा भोजन नली के जोड पर विशेष प्रकार की मांसपेशियां होती है जो अपनी संकुचनशीलता से आमाशय एवं आहार नली का रास्ता बंद रखती है तथा कुछ खाते-पीते ही खुलती है। जब इनमें कोई विकृति आ जाती है तो कई बार अपने आप खुल जाती है और एसिड तथा पेप्सिन भोजन नली में आ जाता है। जब ऐसा बार-बार होता है तो आहार नली में सूजन तथा घाव हो जाते हैं।

लक्षण[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

एसिडिटी का प्रमुख लक्षण है रोगी के सीने या छाती में जलन।[] अनेक बार एसिडिटी की वजह से सीने में दर्द भी रहता है, मुंह में खट्टा पानी आता है। जब यह तकलीफ बार-बार होती है तो गंभीर समस्या का रूप धारण कर लेती है। एसिडिटी के कारण कई बार रोगी ऐसा महसूस करता है जैसे भोजन उसके गले में आ रहा है या कई बार डकार के साथ खाना मुँह में आ जाता है। रात्रि में सोते समय इस तरह की शिकायत ज्यादा होती है। कई बार एसिड भोजन नली से सांस की नली में भी पहुंच जाता है, जिससे मरीज को दमा या खांसी की तकलीफ भी हो सकती है। कभी-कभी मुंह में खट्टे पानी के साथ खून भी आ सकता है।

जटिलताएँ[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

दोनों प्रकार के अल्सर की तीव्रता बढने पर रोगी को खून की उल्टियां हो सकती है। लम्बे समय तक अल्सर रहने से आमाशय में जाने वाला रास्ता सिकुड जाता है जिससे रोगी को तीव्र वमन होते है। कभी अल्सर फूट भी सकता है जिससे पूरे पेट में संक्रमण हो जाता है तथा पेट में तेज दर्द रहता है। लम्बे समय तक अल्सर रहने से केंसर होने का खतरा हो सकता है। इसके साथ ही आयुर्वेदिक नुस्खे से भी एसिडिटी का इलाज किया जा सकता हैं।

निदान (डायग्नोसिस)[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

इस रोग में बेरियम एक्स-रे, एण्डोस्कोपी, सोनोग्राफी के जरिये रोग की जटिलता का पता लगाकर उपचार शुरू किया जा सकता है। साथ ही एसिडिटी के तत्काल समाधान के रूप में क्षार युक्त पदार्थों का सीमित सेवन भी लाभकारी रहता है

सन्दर्भ[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

इन्हें भी देखें[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

  1. "एसिडिटी के कारण".Hindilogy.[१]Retrieved 3 दिसंबर 2019.