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काबा

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साँचा:Infobox religious building साँचा:इस्लाम

काबा या ख़ाने काबा (अरबी: साँचा:Nastaliq, अंग्रेज़ी: Ka'aba, अरबी उच्चारण: का'आ़बा) मक्का, सउदी अरब में स्थित एक घनाकार (क्यूब के आकार की) इमारत है जिसे इस्लाम का सबसे पवित्र स्थल माना जाता है।[] इस्लामी परंपरा के अनुसार इस भवन को सबसे पहले, इब्राहीम के समय में खुद, इब्राहिम ने बनाया था। यह ईमारत, मक्का के मस्जिद-अल-हरम के बीचो-बीच स्थित है। क़ुरान और इस्लामी शरिया के अनुसार दुनिया के सारे मुसलामानों पर यह लागु है की वे नमाज़ के समय काबा की और मुँह कर के नमाज़ अदा करें।[] हज तीर्थयात्रा के दौरान भी मुस्लिमों को तवाफ़ नामक महत्वपूर्ण धार्मिक रीत पूरी करने का निर्देश है, जिसमें काबे की सात परिक्रमाएँ की जाती हैं।[]

नामकरण[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

अरबी शब्द का'आ़बा (كَعْبَة) का शाब्दिक अर्थ होता है "घनाकार"(क्यूब)। इसके अलावा, क़ुरान में इसे "अल-बैत" (साँचा:Lang-ar) और बैती(साँचा:Lang-ar) [2:125, 22:26], बैतिक अल-मुह़र्रम (साँचा:Lang-ar) [14:37], अल-बैत अल-ह़राम (साँचा:Lang-ar) [5:97], अल-बैत अल-अ़तीक़ (साँचा:Lang-ar) [22:29], भी कहा गया है। तथा काबा के इर्द-गिरद के क्षेत्र को अल-मस्जिद अल-हराम भी कहा गया है।

संरचना[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

इस्लामी धारणा और व्युत्पत्ति[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

क़ुरान के कई आयतों में काबा और उसकी व्युत्पत्ति का उल्लेख है। क़ुरान में उल्लेखित कहानी के अनुसार, काबा अल्लाह के लिए बनाया गया पहला प्रार्थनागृह है, जिससे इब्राहिम और उनके पुत्र इस्माइल ने अल्लाह के कहने पे "बक्का" (वर्त्तमान मक्का) में निर्मित किया था। इस कहानी का उल्लेख निम्न आयतों में मिलता है:

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मस्जिद अल-हराम के बीच स्थित काबा

धार्मिक महत्व[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

कि़बला[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

मुख्य लेख - क़िबलाह

इस्लामिक शब्दावली के अनुसार, कि़बला, प्रार्थना के समय रुख करने वाली दिशा को कहा जाता है। इसका उल्लेख क़ुरान की सुरा अल-बक़रा की आयत १४३ और १४४ में मिलता है।साँचा:Cite quran इस्लामिक नियमों के अनुसार नमाज़ अदा करते समय या प्रार्थना करते समय इस दिशा में मुड़ कर ही प्रार्थना की जाती है। इस्लामिक परंपरा के अनुसार काबा ही किबला की दिशा होती है।

तवाफ़[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

साँचा:मुख्य चित्र:Tawaf Ifadha 2016 with Amm Salim.webm इस्लाम के अनुसार प्रत्येक सक्षम मुस्लमान से यह उम्मीद की जाती है की वह अपने जीवन में कमसेकम एक बार हज करे। हज एक इस्लामिक तीर्थयात्रा है, जो इस्लामिक सांवत के ज़ु अल-हिज्जा के महीने में किया जाता है, जिसमें प्रत्येक यात्री को मक्का जा कर कुछ नियमानुसार कार्य करने होते हैं। यह प्रथा इस्लाम के पांच स्तंभों का भी हिस्सा है। इसके अलावा एक छोटी तीर्थ यात्रा भी होती ही, जिसे उमरा कहा जाता है। इन दोनों यात्राओं में यात्रियों को ७ बार काबा की परिक्रमा करनी होती है। इस क्रिया को तवाफ़ कहा जाता है। इस प्रथा का सम्बन्ध मुहम्मद स॰ अ॰ की जीवन से है, जिन्होंने मक्का पर कब्ज़ा करने के बाद, हज करते समय ऐसा किया था। मगर इस्लामिक परंपरा के अनुसार, मक्का तक तीर्थ यात्रा करने की प्रथा अरबों में इस्लाम के आने के अनेक वर्ष पहले, पैगम्बर इब्राहीम के ज़माने से चली आ रही है। हज यात्रा विश्व की सबसे प्रसिद्द धार्मिक यात्राओं में से एक है जिसमे प्रत्येक वर्ष १८ लाख तीर्थ यात्री मक्का आते हैं।[]

इतिहास[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

चित्र:Adriaan-Reland-Verhandeling-van-de-godsdienst-der-Mahometaanen MG 0723.tif

इसलामी अभिलेखेखों और पुरातात्विक शोध से यह सिद्ध होता है की यह भवन कई बार, युद्ध, और प्राकृतिक आपदाओं की वजह से नष्ट हुआ है, तथा मरम्मत और पुनर्निर्मित भी किया गया है। उमय्यद सेना और अब्दुल्लाह इब्न अल-ज़ुबैर के बीच युद्ध में मक्का की पहली घेराबंदी के दौरान ( रविवार , 31 अक्टूबर 683 ईस्वी , पैगम्बर मुहम्मद स॰अ॰ के निधन के ५१ वर्ष बाद) आग से इस संरचना को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त कर दिया गया था।[] इस घटना का बाद, इब्न अल-ज़ुबैरी, जो उमय्यद खिलाफत के विरोधी थे, ने हज़रात अली की मृत्यु से उमय्यद खिलाफत के मज़बूती से अरब भूमि पर पकड़ बनाने के बीच के समय में मक्का पर शासन किया था। इब्न अल-जुबैर ने इस दौरान काबा को पुनः निर्मित किया, जिसमें उन्होंने हतीम की दीवार को भी काबा की संरचना में शामिल कर के बनवाया था। उन्होंने ऐसा एक इस्लामी मान्यता के आधार पर किया (जिसका उल्लेख कई हदीस संग्रहों में पाया जाता है) कि हतीम इब्राहिम द्वारा निर्मित काबा की मूल नींव के अवशेष थे, और मुहम्मद स॰अ॰ काबा का पुनर्निर्माण करना चाहते थे ताकि इसे काबा में शामिल किया जा सके।

तत्पश्चात, काबा को 692 में मक्का की दूसरी घेराबंदी के दौरान, उमय्यद आक्रमणकारियों द्वारा पत्थरों से बमबारी कर, ध्वस्त कर दिया गया था, जिसमें उमाय्याद सेना का नेतृत्व अल-हज्जाज इब्न यूसुफ ने किया था। अब्दुल मलिक इब्न मरवान के अंतर्गत, मक्कई विद्रोह के पतन और इब्न अल-ज़ुबैर की हत्या से उमय्यदों ने अंततः सभी इस्लामी शहरों को अपने शासन के अंतर्गत कर लिया, तथा यह घटना दूसरी फ़ितना का अंत साबित हुई। 693 ईस्वी में, अब्दुल मलिक ने अल-ज़ुबैर द्वारा बनायीं काबा को ध्वस्त कर काबा को पुनः अपने पुराने घनाकार नींव पर बना डाला।

९३० के हज के समय शिआ क़रामतान आक्रमणकारियों ने काबा पे एक क्रूर हमले और रक्तपात के बाद, काबे में स्थित काले पत्थर को चुरा कर अल-अहसा ले जाय गया था, जिसे अब्बासियों द्वारा ९५२ में वापस लाया गया।[] काबा की मूल आकृति तब से अब तक लगभग वैसी ही रही है। काबा की मौजूद संरचना अधिकांशतः १७ वीं शताब्दी में उस्मानों द्वारा बनायी गयी है, जब १६२९ में अत्यधिक वर्षा के के बाद काबा के दीवार ध्वस्त हो गए थे। उसके बाद, इस संरचना को मक्का में ही पाए जाने वाले ग्रेनाइट पत्थरों से बनाया गया। मौजूदा काबा उसी समय से बानी हुई है।[]

इन्हें भी देखें[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

सन्दर्भ[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

  1. "हज से पहले काबा में होती थी कई ईश्वरों की पूजा".[१]Retrieved 19 अगस्त 2018.
  2. Wensinck, A. J; Ka`ba. Encyclopaedia of Islam IV p. 317
  3. Arabia reborn, George Kheirallah, University of New Mexico Press, 1952, ... The Tawaf begins at the Black Stone, and is performed in seven rounds, the first three at a running walk (harwala), and the others at an ordinary walking pace, with the Ka'ba to the left throughout the circuits ...
  4. (12 September 2016)."Saudi Arabia says Hajj 2016 receives 1.8 million pilgrims".Al Arabiya English'.[२]
  5. "On this day in 683 AD: The Kaaba, the holiest site in Islam, is burned to the ground".[३]Retrieved 19 अक्तूबर 2018.
  6. "पहले भी इन कारणों से रोकी जा चुकी है मक्का-मदीना की पवित्र यात्रा, पढ़ें रिपोर्ट".[४]
  7. "History of the Kaba".[५]Retrieved 18 फ़रवरी 2020.