त्र्यम्बक शर्मा
त्र्यम्बक शर्मा (५ सितम्बर १९७०) भारत के युवा कार्टूनिस्ट हैं। उन्हें विशेष रूप से कार्टून आधारित एकमात्र मासिक पत्रिका[१] कार्टून वाच के संस्थापक के रूप में जाना जाता है। शंकर्स वीकली के बाद भारत में कार्टून पत्रिका प्रारंभ करने वाले त्र्यम्बक शर्मा का जन्म छत्तीसगढ़ में और शिक्षा दुर्ग-भिलाई और रायपुर में हुई। भिलाई के कल्याण महाविद्यालय से विज्ञान में स्नातक होने के बाद त्र्यम्बक ने रायपुर से पत्रकारिता में स्नातक डिग्री प्राप्त की। कार्टून वाच पत्रिका के प्रकाशन के चलते वे सपरिवार रायपुर में ही बस गए।[२]
उन्होंने तीन वर्ष रायपुर के सुप्रसिद्ध अंग्रेज़ी दैनिक़ द हितवाद मे तथा एक वर्ष हिंदी दैनिक देशबंधु में मे बतौर संवाददाता कार्य भी किया।
रायपुर में दैनिक नवभारत में काम करते हुए उन्होंने १९९१ में दैनिक कार्टून बनाना प्रारंभ किया। १९९२ से उनके कार्टून दैनिक भास्कर के रायपुर संस्करण में प्रथम पृष्ठ पर प्रकाशित होना प्रारंभ हुए। १९९६ में उन्होंने दैनिक भास्कर की नौकरी छोड़कर मासिक पत्रिका कार्टून वाच का प्रकाशन रायपुर से आरम्भ किया। कार्टून वाच राजनीतिक और सामाजिक कार्टूनों पर आधारित भारत की एक मात्र हिंदी कार्टून मासिक पत्रिका है। यह पत्रिका जहाँ पुराने कार्टूनिस्टों के कार्टूनों का पुनः प्रकाशन करती है वहीं नए कार्टूनिस्टों की प्रतिभा को सामने लाने का लिए भी मंच प्रदान करती है। देश-विदेश में अपनी प्रदर्शनियाँ करने वाले त्र्यंबक रायपुर में एक कार्टून संग्रहालय बनाने में लगे हैं।[३]
पुरस्कार व सम्मान सम्पादित करें
अनेक सम्मानो व पुरस्कारों से अलंकृत त्र्यंबक को वर्ष २००८ में उन्हें जेसीआई द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार 'टेन आउटस्टेंडिंग यंग इंडियन अवार्ड' (टॉय) पांडिचेरी में प्रदान किया गया। उनकी कार्टून पत्रिका बे वाच को लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रेकार्ड्स में शामिल किया गया है। यह देश की एक मात्र मासिक कार्टून पत्रिका है जो हिंदी और अँग्रेजी दोनो भाषाओं में प्रकाशित होती है।[४]
सन्दर्भ सम्पादित करें
- ↑ "भारत की एकमात्र कार्टून पत्रिका".बीबीसी हिंदी.[१]Retrieved १३ मई २००९.
- ↑ "त्रयम्बक शर्मा".कार्टूनवाचइंडिया.[२]Retrieved १७ मार्च २००९.
- ↑ "लंदन में त्र्यंबक के कार्टूनों ने ब्रितानियो को रिझाया".स्वतंत्रआवाज़.[३]Retrieved १७ मार्च २००९.
- ↑ "Only bilingual cartoon monthly".लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रेकार्ड्स.[४]Retrieved १७ मार्च २०१२.