वाष्पोत्सर्जन
दिखावट

पौधों द्वारा अनावश्यक जल को वाष्प के रूप में शरीर से बाहर निकालने की क्रिया को वाष्पोत्सर्जन कहा जाता है। पैड़-पौधे मिट्टी से जिस जल का अवशोषण करते हैं, उसके केवल थोड़े से अंश का ही पादप शरीर में उपयोग होता है। शेष अधिकांश जल पौधों द्वारा वाष्प के रूप में शरीर से बाहर निकाल जाता है। पौधों में होने वाली यह क्रिया वाष्पोत्सर्जन कहलाती है। वाष्पोत्सर्जन की दर को एक यन्त्र द्वारा मापा जा सकता है। इस यन्त्र को पोटोमीटर कहते हैं। [१]
सन्दर्भ[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]
इसे पौधों में आवश्यक जल की हानी भी कहा जाता है
- ↑ त्रिपाठी, नरेन्द्र नाथ सरल जीवन विज्ञान, भाग-२. कोलकाता:शेखर प्रकाशन.पृ. ८६-८७.