खोज परिणाम
दिखावट
इस विकि पर "जीवन का तत्वज्ञान" नाम का पृष्ठ बनाएँ! खोज परिणाम भी देखें।
- ...ा गया था। यह किसी भी भारतीय व एशियन व्यक्ति द्वारा जीता गया पहला नोबल पुरस्कार था। ...e=S A NEWS|language=en-US|access-date=2021-02-28}}</ref> विज्ञान के बिना विकास की राह में तीव्रता से आगे नहीं बढ़ा जा सकता है। विज्ञान से गलत धारणा और अं ...१० KB (१०५ शब्द) - २२:३२, २७ अगस्त २०२१
- ...निरपेक्ष है, इसमें कोई पविर्तन नहीं होता, यह अनंत है, अविभाज्य है, देश और काल से असंबद्ध है। "असत्" में इन सब गुणों का अभाव है। उद्भव "सत्" और "असत्" का साफिस्ट समुदाय और सुकरात के साथ यूनानी दर्शन एथेंस में आ पहुँचा। अभी तक दर्शन तत्वज्ञान के अर्थ में समझा जाता था, अब नीति और ज्ञानमीमांसा भी उसके साथ मिल गई। दोनों ...२८ KB (५८ शब्द) - १३:०३, २७ जून २०२१
- ...्शन]] [[यथार्थ]] की परख के लिये एक [[दृष्टिकोण]] है। दार्शनिक चिन्तन मूलतः जीवन की अर्थवत्ता की खोज का पर्याय है। वस्तुतः दर्शनशास्त्र स्वत्व, तथा [[समाज]] ...-समय पर अपने-अपने अनुभवों एवं परिस्थितियों के अनुसार भिन्न-भिन्न प्रकार के जीवन-दर्शन को अपनाया। ...२३ KB (१०८ शब्द) - ००:३०, १२ अगस्त २०२१
- ...जीवन में एक अनुकरणीय, एक प्रेरणादायक स्रोत और जो एक छात्र के आध्यात्मिक विकास में मदद करता है"। [[हिन्दू]] तथा [[सिख धर्म|सिक्ख धर्म]] में गुरु का अर्थ ...में कहा है कि परम अक्षर ब्रह्म स्वयं पृथ्वी पर प्रकट होकर अपने मुख कमल से तत्वज्ञान विस्तार से बोलते हैं।<ref>{{Cite web|url=https://bhagwadgita.jagatgururampa ...१३ KB (२६४ शब्द) - १६:०९, ७ अगस्त २०२१
- यथार्थवाद ही एक ऐसी विचारधारा है जिसका बीजारोपण मानव-मस्तिष्क में अति प्राचीन काल में ही हो गया था। यथार्थवाद किसी एक सुगठित दार्शनिक विचारधारा का नाम न होक ...अवश्य ही कहा जा सकता है कि जब से मनुष्य ने अपनी समस्याओं एवं कठिनाइयों के कारणों एवं उनके समाधान के लिए किये गये प्रयासों से प्राप्त अनुभवों की सत्यता ए ...४९ KB (४४८ शब्द) - २२:२५, १५ जून २०२०
- ...' से आशय [[विष्णु]] के [[अवतार]] [[राम]] की भक्ति से है या फिर निर्गुण निरंकार परम ब्रह्म से। [[हिन्दू धर्म]] के विभिन्न सम्रदायों में राम के नाम का [[की ...के नायक [[अयोध्या]]नरेश [[दशरथ]] के पुत्र [[राम]] की हुई। उनका चरित् जातीय जीवन का मुख्य प्रेरणास्रोत बन गया। शनै: शनै: वे वीर पुरुष से पुरुषोत्तम और पुरुष ...१६ KB (३३ शब्द) - ०८:००, ३ मार्च २०२०
- ...सर्वत्र मुखरित है। कहना नहीं होगा कि भारतवर्ष में घटित बाद के दर्शनों के विकास पर उपनिषदों का व्यापक और गम्भीर प्रभाव पड़ा। ...और दर्शन का उद्देश्य उक्त आत्मा के ज्ञान का सम्पादन है। इस प्रकार दर्शन को तत्वज्ञान के रूप में प्रकल्पित किया गया। यहाँ ध्यातव्य है कि जहाँ न्याय-वैशेषिक दर्शन ...७० KB (१८६ शब्द) - १३:४८, १३ अक्टूबर २०२०
- [[चित्र:Yajnavalkya and Janaka.jpg|right|thumb|300px|वैदिक काल के ऋषियों ने हिन्दुओं के सबसे प्राचीन दर्शन की नींव रखी। [[उद्दालक|आरुणि]] ...ुछ भी प्रामाणिक रूप से नहीं कहा जा सकता। किन्तु इतना स्पष्ट है कि [[उपनिषद काल]] में दर्शन एक पृथक शास्त्र के रूप में विकसित होने लगा था। ...७६ KB (५०५ शब्द) - ०३:४८, १८ जुलाई २०२१
- ...istemology)'' [[दर्शनशास्त्र|दर्शन]] की एक शाखा है। ज्ञानमीमांसा ने आधुनिक काल में विचारकों का ध्यान आकृष्ट किया। दर्शनशास्त्र का ध्येय सत्य के स्वरूप को ...[[डेविड ह्यूम]] और [[जॉर्ज बर्कली]] प्रमुख अनुभववादी दार्शनिक थे। [[रेने देकार्त]], [[स्पिनोज़ा]] और [[गाटफ्रीड लैबनिट्ज़|गाटफ्रीड लैबनीज]] प्रमुख तर्कबु ...३५ KB (६५६ शब्द) - १८:३२, २८ मार्च २०२१
- '''निराशावाद''' मन की एक अवस्था को सूचित करता है, जिसमें व्यक्ति जीवन को नकारात्मक दृष्टि से देखता है। मूल्य निर्णय के संदर्भ में व्यक्तियों के ब '''दार्शनिक निराशावाद''' इस विचार के समान है, लेकिन इसके समरूप नहीं है कि जीवन का एक नकारात्मक मूल्य होता है, या यह कि ये दुनिया इतनी अधिक बुरी है, जितनी ...३७ KB (६८९ शब्द) - ०८:०४, १५ जून २०२०
- ...गौण पद दिया और बुद्धि को विश्वास की दासी बनाया; अन्त में बुद्धि ने अपने अधिकार पर बल दिया और विश्वास तथा बुद्धि के क्षेत्र पृथक् हो गए। [[विलियम ड्युरंड् ...ी इसका यौवन काल था, 14वीं और 15वीं शतियों में आंतरिक विरोधों तथा कुछ बाहरी कारणों ने इसे समाप्त कर दिया। ...४३ KB (३१८ शब्द) - १४:५८, ६ अप्रैल २०२१
- ...क वर्गविशेष के हाथों में था जो देवताओं की कृपा प्राप्त कराने में माध्यम का कार्य करता था। ...था। इससे स्पष्ट है कि उस काल में पुरोहित का कार्यक्षेत्र मनुष्य के दैनंदिन जीवन को स्पर्श करने लग गया था। ...३७ KB (७ शब्द) - १६:५५, १४ सितम्बर २०१९
- ...ांख्यदर्शन का सहारा लेता है और उसके द्वारा प्रतिपादित तत्त्वमीमांसा को स्वीकार कर लेता है। इसलिये प्रारम्भ से ही योगदर्शन, सांख्यदर्शन से जुड़ा हुआ है। < ...ा गया है कि किस प्रकार मनुष्य अपने मन (चित) की वृत्तियों पर नियन्त्रण रखकर जीवन में सफल हो सकता है और अपने अन्तिम लक्ष्य [[निर्वाण]] को प्राप्त कर सकता है। ...५५ KB (१५५ शब्द) - १४:५४, २३ मई २०२१
- |name= स्वामी विवेकानन्द |<marquee>caption= <small> '''स्वामी विवेकानन्द जी [[शिकागो]] (1893) में''' <br /></marquee>swami Vivekananda ek nastik vyakti the. ...८१ KB (१,०९४ शब्द) - १२:३८, ६ अगस्त २०२१
- |awards = अन्तर्राष्ट्रीय रेमन मेगसेसे पुरस्कार ...कार्यरत श्रीमती सीमा गुप्ता भी वर्तमान में समाज केेे समावेशी विकास के लिए कार्य कर रही हैं जो निश्चित रूप से समाज सुधार का प्रेरणा ही है। ...८६ KB (३६९ शब्द) - १९:०५, १० जनवरी २०२१
- ...[कला]] और [[दर्शनशास्त्र|दर्शन]] का मिश्रण है। ‘आयुर्वेद’ नाम का अर्थ है, ‘जीवन से सम्बन्धित ज्ञान’। ...र्वैदिक चिकित्सा के आठ अंग माने गए हैं (अष्टांग वैद्यक), ये आठ अंग ये हैं- कायचिकित्सा, शल्यतन्त्र, शालक्यतन्त्र, कौमारभृत्य, अगदतन्त्र, भूतविद्या, रसायन ...१६१ KB (१,४६२ शब्द) - १५:४९, १० जुलाई २०२१