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पृष्ठ शीर्षक मिलान
- {{जैन धर्म}} ...मुख तीर्थ क्षेत्रों वाले राज्यों के अनुसार दी गई है। भारत के '''प्रमुख जैन तीर्थ''' क्षेत्र इस प्रकार हैं - ...२४ KB (१९ शब्द) - २०:४०, ३१ मई २०२१
- ...त्र वह पावन भूमि होती है जहाँ की मिट्टी तक पावन होती है।मैं आपके सामने कुछ जैन क्षेत्र प्रस्तुत करता हूँ और आशा करता हूँ कि वे सभी लेख आपको पसंद आवें। ==तीर्थ क्षेत्र== ...३ KB (६ शब्द) - ०२:०४, १२ अप्रैल २०२०
पृष्ठ के टेक्स्ट में मिलान
- ...मास्को]] में [[व्लादिमीर लेनिन|लेनिन]] की समाधि [[साम्यवाद]]ियों के लिए एक तीर्थ है। == हिन्दू धर्म के महत्त्वपूर्ण तीर्थ == ...४ KB (१९ शब्द) - १०:३१, २५ दिसम्बर २०२०
- {{साँचा:जैन तीर्थंकर | subheader = '''पाँचवें [[तीर्थंकर]]''' ...२ KB (१४ शब्द) - ०७:५३, ६ मार्च २०२०
- ...त्र वह पावन भूमि होती है जहाँ की मिट्टी तक पावन होती है।मैं आपके सामने कुछ जैन क्षेत्र प्रस्तुत करता हूँ और आशा करता हूँ कि वे सभी लेख आपको पसंद आवें। ==तीर्थ क्षेत्र== ...३ KB (६ शब्द) - ०२:०४, १२ अप्रैल २०२०
- ...[[दिगम्बर दीक्षा]] [[आचार्य विमल सागर]] के हाथों सम्पन्न हुई। [[पुष्पगिरी तीर्थ]] का निर्माण कार्य आचार्य पुष्पदंत सागर की प्रेरणा से हो रहा है। [[श्रेणी:जैन आचार्य]] ...१ KB (३ शब्द) - १९:०८, ३ मार्च २०२०
- [[चित्र:Ranakpur-temple.jpg|right|thumb|[[रणकपुर जैन मंदिर]], राजस्थान]] '''जैन मंदिर''' [[जैन धर्म]] के अनुयायीयों के लिए [[जैन धर्म में भगवान|भगवान]] की पूजा और दर्शन का स्थान है '''।<ref><span class="c ...५ KB (१८९ शब्द) - २२:५९, ६ जून २०२१
- ...राज्य|मुग़ल]] बादशाह शाह आलम के खजांची थे। वे [[दिल्ली]] में कई [[जैन धर्म|जैन]] मंदिरों के निर्माण<ref>About Prachin Digamber Jain Temple, Hastinapur htt ...amberjainmandirhastinapur.org/temple-history.htm हस्तिनापुर प्राचीन दिगंबर जैन मंदिर] ...३ KB (२२८ शब्द) - ०१:१५, २६ अप्रैल २०२१
- | subheader = उन्नीसवें जैन [[तीर्थंकर]] ...चिन्ह कलश था। इनके यक्ष का नाम कुबेर और यक्षिणी का नाम धरणप्रिया देवी था। जैन धर्मावलम्बियों के अनुसार भगवान श्री मल्लिनाथ जी स्वामी के गणधरों की कुल संख ...६ KB (२०५ शब्द) - २१:००, ५ अगस्त २०२१
- ...Kalaish.jpg|350px|thumb| कैलाश पर्वत बौद्ध,जैन और हिन्दु धर्मावलंबियों के तीर्थ स्थानों में सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। ]] ...इस स्थान पर आकर उन्हें निर्वाण की प्राप्ति होती है। वहीं जैन धर्म के पहले तीर्थंकर ने भी यहीं निर्वाण लिया। कुछ लोगों का मानना यह भी है कि गुरु नानक ने भी ...५ KB (१३ शब्द) - २२:०६, १५ अगस्त २०२१
- {{जैन धर्म}} ...ं और अन्य सभी जीवित प्राणियों की तरह, अपनी आयु पूरी कर अंत में मर जाते है। जैन धर्म के अनुसार इस सृष्टि को किसी ने नहीं बनाया। देवी, देवताओं जो स्वर्ग में ...१४ KB (१६६ शब्द) - १७:५१, २० सितम्बर २०२०
- {{जैन धर्म}} ...मुख तीर्थ क्षेत्रों वाले राज्यों के अनुसार दी गई है। भारत के '''प्रमुख जैन तीर्थ''' क्षेत्र इस प्रकार हैं - ...२४ KB (१९ शब्द) - २०:४०, ३१ मई २०२१
- ...ड के Mula संघ. यह अक्सर कहा जाता है ''Balatkara गण सरस्वती Gachchha''.<ref>जैन Shilalekh Samgrah, भाग 4, विद्याधर Johrapurkar, भारतीय Jnanapith, 1961</ref ...गंबर जैन Abhilekh, मध्यप्रदेश: 13 वीं सभी नए ग्राफिक्स Tak, डॉ Kasturchand जैन सुमन, 2001</ref> ...१० KB (२०१ शब्द) - १२:०३, १५ जून २०२०
- {{बौद्ध तीर्थ}} [[विश्व में बौद्ध धर्म]] के बहुत से तीर्थ स्थल हैं। इनमें से कुछ प्रमुख इस प्रकार से हैं:- [[विहार]], [[पगोडा]], [[स् ...२० KB (६३ शब्द) - ०४:२३, २६ अगस्त २०२१
- {{जैन तीर्थंकर | subheader = प्रथम [[तीर्थंकर]] ...१३ KB (२८२ शब्द) - ११:१०, २५ अगस्त २०२१
- {{जैन धर्म}} ...रतधारी श्रावक मरण के समय होने वाली सल्लेखना को प्रतिपूर्वक सेवन करे"।{{Sfn|जैन|२०११|p=१०२}} ...१२ KB (३०१ शब्द) - ००:१३, १६ जून २०२०
- ...ास के बर्फ से आच्छादित 22,028 फुट ऊँचे शिखर और उससे लगे [[मानसरोवर]] का यह तीर्थ है और इस प्रदेश को मानसखंड कहते हैं। कदाचित प्राचीन साहित्य में उल्लिखित मे जैन धर्म में भी इस स्थान का महत्व है। वे कैलास को अष्टापद कहते है। कहा जाता है ...९ KB (१५ शब्द) - १४:४८, ३० जुलाई २०२०
- '''भरत चक्रवर्ती,''' प्रथम [[तीर्थंकर]] [[ऋषभदेव]] के ज्येष्ठ पुत्र थे। जैन और हिन्दू पुराणों के अनुसार वह [[चक्रवर्ती]] सम्राट थे और उन्ही के नाम पर [ ...ं गए आदिपुराण में प्रथम चक्रवर्ती भरत का विस्तार से वर्णन किया है ; प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव और यशावती के पुत्र चक्रवर्ती भरत एक महान शासक थे जिनके नाम पर इस ...११ KB (२६९ शब्द) - ०२:४६, २६ फ़रवरी २०२१
- {{about|जैन धर्म में भगवान}} | deity_of = [[जैन धर्म में भगवान|जैन भगवान]] ...१८ KB (६४० शब्द) - १०:२९, ३१ अगस्त २०२०
- ...}}. Routledge. pp. 203–204. ISBN 1-134-50165-X.</ref> । वर्तमान काल में भी जैन साधु एक स्थान से दूसरे स्थान पर पैदल भ्रमण करते रहते हैं जिसे 'विहार' कहा ज * [[बौद्ध धर्म के तीर्थ स्थल|बौद्ध तीर्थ]] ...११ KB (२६५ शब्द) - ००:०३, १ अगस्त २०२१
- ...आच्छादित 6,638 मीटर (21,778 फुट) ऊँचे शिखर और उससे लगे [[मानसरोवर]] का यह तीर्थ है। और इस प्रदेश को मानसखंड कहते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार [[ऋषभदेव|भगवा [[जैन धर्म|जैन]] धर्म में इस स्थान का बहुत महत्व है। इसी पर्वत पर श्री भरत स्वामी ने रत्नो ...१३ KB (१५६ शब्द) - ०७:०६, २६ मई २०२१
- इन संतों ने हिंदू-मुसलमान, जैन- वैष्णव, द्विज- शूद्र, सगुण-निर्गुण, भक्ति व योग के द्वन्द्व को समाप्त कर ए ...चलित आडम्बरों, रुढियों एवं अंधविश्वासों का भी विरोध किया। उनका मानना था कि तीर्थ यात्रा, स्नान, जप, तप, व्रत, उपवास तथा हाथ में माला लेने मात्र से ब्रह्म को ...५ KB (६१ शब्द) - २१:४७, २७ अगस्त २०२१