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- {{/box-header|<big>हिन्दू धर्म प्रवेशद्वार</big>|प्रवेशद्वार:हिन्दू धर्म/Intro|}} {{प्रवेशद्वार:हिन्दू धर्म/Intro}} ...५ KB (१०८ शब्द) - ०६:३१, ४ मार्च २०१९
- ...न वर्णों के बीच अलग सा रिश्ता बनता जा रहा है । कहा जाता है कि हिटलर भारतीय वर्ण व्यवस्था से बहुत प्रभावित हुआ था । [[हिन्दू वर्ण व्यवस्था|पूर्ण लेख पढ़ें]] ...२ KB (५ शब्द) - २३:३६, १९ सितम्बर २००९
- '''पाताल''' [[हिन्दू धर्म]] के अनुसार पृथ्वी के नीचे होते हैं। [[विष्णु पुराण]] के अनुसार सात प्रकार सुन्दर महलों से युक्त वहां की भूमियां शुक्ल, कृष्ण, अरुण और पीत वर्ण की तथा शर्करामयी (कंकरीली), शैली (पथरीली) और सुवर्णमयी हैं। वहां दैत्य, दान ...२ KB (४ शब्द) - १४:३२, २९ अगस्त २०२०
- ...कहलाते हैं। यह सम्प्रदाय वैदिक काल से ही अस्त्तित्व में है । सनातन धर्म की वर्ण व्यवस्था में सूर्य की उपासना का उलेख मिलता है । ब्राह्मणों में संध्या कर्म [[श्रेणी:हिन्दू धर्म]] ...१,०१३ बाइट (२ शब्द) - २२:४२, ९ मार्च २०१८
- ...rn-religions/hinduism/sudra</ref> भारत में [[हिन्दू वर्ण व्यवस्था]] के चार वर्णों में से एक है।{{sfn|Varadaraja V. Raman|2006|pp= 200–204}} जो कि जन्म के आ ...स्तक '''''हु वर द शूद्रस?''''' में [[ऋग्वेद]], [[महाभारत]] और अन्य [[वैदिक धर्म|प्राचीन वैदिक धर्मग्रंथों]] का हवाला देते हुए वे कहते हैं कि शूद्र मूल रूप ...४ KB (२९९ शब्द) - १०:२५, १५ अगस्त २०२१
- ...पिक है, [[संन्यास|सन्यास]] की है, जब व्यक्ति सांसारिक मोह माया के परे जाकर केवल भगवत् स्मरण करता है। इस अवस्था के लिए यह अनिवार्य है कि मनुष्य ने अपने सा [[श्रेणी:हिन्दू धर्म के वर्ण]] ...३ KB (२ शब्द) - ०५:५०, ७ मार्च २०२०
- {{सन्दूक हिन्दू धर्म}} ...alik 2005 p.48"/> इन और अन्य सनातन ग्रंथों ने सिद्धांत रूप में समाज को चार वर्णों में वर्गीकृत किया:<ref name="Doniger 1999 186">{{cite book |last=Doniger ...६ KB (३०६ शब्द) - ११:४०, ११ अगस्त २०२१
- ...प्रतिज्ञाओं का अनुसरण करने की सलाह दी। इस आंदोलन को [[श्रीलंका]]इ [[बौद्ध धर्म|बौद्ध]] भिक्षुओं का भरपूर समर्थन मिला।<ref>{{स्रोत पुस्तक|url=https://books [[श्रेणी:बौद्ध धर्म]] ...४ KB (५१ शब्द) - १५:५०, २१ मई २०२१
- ...ाह से उत्पन्न संतान के विषय में ऐसा सामान्य मत जान पड़ता है कि उसे माता के वर्ण के अनुरूप मानते हैं। इसका एक विपरीत उदाहरण बौद्ध जातकों में फिक ने 'भद्दसाल [[श्रेणी:हिन्दू धर्म]] ...५ KB (१३ शब्द) - ०२:१५, १ मार्च २०२०
- '''श्रीवत्स''' [[हिन्दू धर्म]] और [[बौद्ध धर्म]], दोनों के लिए ही मंगलकारी चिह्न है। * भगवान की दिव्य मूर्ति कुछ हरित वर्ण की, पाषाण शिला में है। मूर्ति की ऊंचाई लगभग डेढ फुट है। भगवान पद्मासन में व ...४ KB (५४ शब्द) - २३:१८, १५ जून २०२०
- ...tory/history-of-vaishnavism-and-important-facts-1-769785.html|title=वैष्णव धर्म का इतिहास और महत्वपूर्ण तथ्य|website=aajtak.intoday.in|language=hi|access रामान्दाचार्य जी ने सर्व धर्म समभाव की भावना को बल देते हुए कबीर, रहीम सभी वर्णों (जाति) के व्यक्तियों को भक्ति का उपदेश किया। आगे रामानन्द संम्प्रदाय में ...७ KB (१३७ शब्द) - १३:३३, १६ जून २०२१
- हिन्दु धर्म में विष्णु पुराण के अनुसार पृथ्वी का वर्णन इस प्रकार है। ...षि से कियी था। उनके अनुसार इसका वर्णन सौ वर्षों में भी नहीं हो सकता है। यह केवल अति संक्षेप वर्णन है। ...४ KB (९ शब्द) - ०६:५२, ३१ जनवरी २०१७
- हिन्दु धर्म में विष्णु पुराण के अनुसार पृथ्वी का वर्णन इस प्रकार है। ...षि से कियी था। उनके अनुसार इसका वर्णन सौ वर्षों में भी नहीं हो सकता है। यह केवल अति संक्षेप वर्णन है। ...४ KB (९ शब्द) - १७:२५, २४ अगस्त २०२१
- |अनुयायी = [[हिन्दू धर्म|हिन्दू]], [[भारतीय]], भारतीय प्रवासी तत्पश्चात पीत वर्ण के गन्ध-पुष्प और अक्षत से विधिविधान से पूजन करें। {{citation needed}} ...४ KB (३३ शब्द) - ००:०२, २६ अगस्त २०२१
- हिन्दु धर्म में विष्णु पुराण के अनुसार पृथ्वी का वर्णन इस प्रकार है। ...षि से कियी था। उनके अनुसार इसका वर्णन सौ वर्षों में भी नहीं हो सकता है। यह केवल अति संक्षेप वर्णन है। ...४ KB (९ शब्द) - ००:५५, ३ फ़रवरी २०१७
- [[चित्र:Avatars.jpg|right|thumb|250px|हिन्दू धर्म में [[गौतम बुद्ध]] को [[विष्णु]] के दस [[अवतार|अवतारों]] में से एक माना जात ...ाय में [[गौतम बुद्ध]] को [[दशावतार|दसवाँ अवतार]] माना गया है हालाँकि बौद्ध धर्म इस मत को स्वीकार नहीं करता। ...१३ KB (३२३ शब्द) - २३:३५, २० जुलाई २०२१
- यहां पुष्कर, पुष्कल, धन्य और तिष्य नामक चार वर्ण हैं। [[श्रेणी:हिन्दू धर्म]] ...५ KB (९ शब्द) - ००:५८, २४ अप्रैल २०२०
- ...हिन्दू विचारकों द्वारा की गई है। धार्मिक आलोचना एक संवेदनशील मुद्दा है तथा धर्म के अनुयायी इससे असहमत भी होते हैं किंतु गौरतलब है कि आलोचनाओं के फलस्वरूप ह हिन्दू धर्म की कई रीतियाँ जिनका समय समय पर विरोध किया जाता रहा है, उनमें से प्रमुख हैं- ...११ KB (४७४ शब्द) - १२:१६, २७ जनवरी २०२१
- ...संप्रदाय''' के प्रवर्त्तक स्वामी रामचरण जी महाराज थे। जन को लोकभाषा में [[धर्म]] के मर्म की बात समझाकर, एक सूत्र में पिरोने में इस संप्रदाय से जुड़े लोगों ...की जो सबके लिए सुकर एवं ग्राह्य था। आगे चलकर मानवीय मूल्यों से सम्पन्न इसी धर्म को "रामस्नेही संप्रदाय' की संज्ञा से अभिहित किया गया। ...५ KB (६१ शब्द) - २१:४७, २७ अगस्त २०२१
- ...े मिलते है जहां विष्णु को ''शालीग्रामम्'' के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू धर्म में शालीग्राम को सालग्राम के रूप में जाना जाता है। शालीग्राम का सम्बन्ध साल जिस शालिग्राम-शिला में द्वार-स्थान पर परस्पर सटे हुए दो चक्र हों, जो शुक्ल वर्ण की रेखा से अंकित और शोभा सम्पन्न दिखायी देती हों, उसे भगवान श्री गदाधर का स ...१९ KB (२३३ शब्द) - १९:२२, २८ जुलाई २०२१