सुचित्रा सेन
साँचा:ज्ञानसन्दूक व्यक्ति सुचित्रा सेन (जन्म: ६ अप्रैल १९३१ - १७ जनवरी २०१४) हिन्दी एवं बांग्ला फिल्मों की एक अभिनेत्री थीं। वह मुनमुन सेन की माँ थी।
विशेषकर उत्तम कुमार के साथ अभिनय करने के कारण वे सारे बंगाल में अत्यन्त जनप्रिय हुईं। उत्तम-सुचित्रा की जोड़ी आज भी बांग्ला चलचित्र की श्रेष्ठ जोड़ी मानी जाती है।
वे प्रथम भारतीय अभिनेत्री हैं जिनको किसी अन्तर्राष्ट्रीय चलचित्र महोत्सव में पुरस्कार प्रदान किया गया (श्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार - 'सात पाके बाँधा' १९६३ के लिए, मास्को चलचित्र उत्सव)।
प्रमुख फिल्में[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]
सुचित्रा सेन ने केवल चार हिन्दी फ़िल्मों में अभिनय किया है जो नीचे दी गयी हैं:-
| वर्ष | फ़िल्म | चरित्र | टिप्पणी |
|---|---|---|---|
| 1955 | देवदास | पारो | पहली हिन्दी फ़िल्म |
| 1960 | बम्बई का बाबू | माया | दूसरी हिन्दी फ़िल्म |
| 1966 | ममता | देवयानी/पन्नाबाई/सुपर्णा | तीसरी हिन्दी फ़िल्म |
| 1975 | आँधी | आरती देवी | चौथी एवं अन्तिम हिन्दी फ़िल्म |
- साड़े चुयात्तर (१९५३)
- ओरा थाके ओधारे (१९५४)
- अग्निपरीक्षा (१९५४)
- शापमोचन (१९५५)
- सबार उपरे (१९५५)
- सागरिका (१९५६)
- पथे हल देरि (१९५७)
- हारानो सुर (१९५७)
- दीप ज्बेले याइ (१९५९)
- सप्तपदी (१९६१)
- बिपाशा (१९६२)
- चाओया-पाओया
- सात-पाके बाँधा (१९६३), इसके लिए मास्को अन्तरराष्ट्रीय चलचित्र उत्सव में उनको सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार प्रदान किया गया था।
- हस्पिटल
- शिल्पी (१९६५)
- इन्द्राणी (१९५८)
- राजलक्षी ओ श्रीकान्त (१९५८)
- सूर्य तोरण (१९५८)
- उत्तर फाल्गुनि (१९६३) (हिन्दी में पुनः ममता नाम से निर्मित)
- गृहदाह (१९६७)
- फरियाद
- देबी चौधुरानी (१९७४)
- दत्ता (१९७६)
- प्रणय पाशा
- प्रिय बान्धबी
निधन[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]
२३ दिसम्बर २०१३ को उन्हें श्वसन तंत्र में संक्रमण की वजह से कोलकाता के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। १७ जनवरी २०१४ को दिल का दौरा पड़ने से ८२ वर्ष की आयु में उनकी मृतु हो गयी।[१][२]
सन्दर्भ[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]
बाहरी कड़ियाँ[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]
- सुचित्रा सेन : सौंदर्य और अभिनय की आंधी (वेबदुनिया)