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- ...िसी बाहरी वस्तु का प्रवेश कर दिया जाये या फ़िर अपने आप ही करा दिया जाये तो शरीर मे होने वाली क्षति से [[आहत]] जीव को घायल कहा जाता है। ...६७८ बाइट (१ शब्द) - ०५:५८, १५ जनवरी २०२१
- ...म''' कहलाती हैं। इस क्रिया के फलस्वरूप ही शरीर में नए पदार्थों का संश्लेषण शरीरिक, विकास, वृद्धि एवं संरक्षण सम्भव है। [[प्रकाश-संश्लेषण]] एक महत्वपूर्ण एन ...९१८ बाइट (४ शब्द) - ०२:२७, २४ अगस्त २०२१
- ...संकुचन एवं प्रसारण होंने की क्रिया को दौरे पड़ना कहते हैं। इसके प्रभाव से शरीर अनियन्त्रित रूप से कांपता है।<ref name="medline">{{Cite web |url=http://www ...८१७ बाइट (४० शब्द) - ०६:४७, १५ जून २०२०
- [[चित्र:Human physiology.jpg|पाठ=|अंगूठाकार|302x302पिक्सेल|मानव शरीरों की ऊपरी विशेषताएँ]] ...्री तथा पुरूष) के शरीर की संरचना (morphology) का वैज्ञानिक अध्ययन, '''मानव शरीर-रचना विज्ञान''' या '''मानव शारीरिकी''' (human anatomy) के अन्तर्गत किया जात ...२ KB (१२० शब्द) - १४:४७, ३ मई २०२१
- ...्रकार के शॉक से अचानक [[हृदय]] पर दबाव पड़ता है, [[तापमान]] कम हो जाता है, शरीर को झटका लगता है या कोई अचानक गिर जाए तो भी बेहोशी की स्थिति होती है। ...[[लक्षण]] में [[चेहरे]] एवम होंठो पर अस्वाभाविक पीलापन उत्पन्न हो जाता है। शरीर की त्वचा ठंडी एवम चिपचिपी हो जाती है। बेचैनी और [[थकावट]] महसूस होना बेहोशी ...२ KB (२९ शब्द) - १८:३८, २१ जनवरी २०१७
- ...्मक जैव-रासायनिक क्रियायों को '''केटाबोलिक क्रिया''' कहते हैं। ये क्रियाएं शरीर की जीवित [[कोशिका|कोशिकाओं]] के अन्दर जीव द्रव्य में सम्पन्न होती हैं। इन क ...१ KB (१६ शब्द) - १७:०८, १९ अक्टूबर २०२०
- ...पादप शरीर में उपयोग होता है। शेष अधिकांश जल पौधों द्वारा वाष्प के रूप में शरीर से बाहर निकाल जाता है। पौधों में होने वाली यह क्रिया वाष्पोत्सर्जन कहलाती ह ...२ KB (२४ शब्द) - ०९:४९, २९ नवम्बर २०१९
- [[शरीर का निर्जलीकरण|निर्जलीकरण]] के समाधान हेतु प्रयुक्त एक चिकित्सा पद्धति। ...२७१ बाइट (० शब्द) - १४:१४, ११ अक्टूबर २०१३
- ...ं में शरीर पर इसके लेप का विधान है। इसको [[सृष्टि रचना|सृष्टि की रचना]] और शरीर की रचना में प्रयुक्त 5 तत्वों में से एक समझा जाता है। ...१ KB (२५ शब्द) - १९:४४, १७ जनवरी २०२१
- [[रक्त]] या शरीर के अन्य [[ऊतक|ऊतकों]] में [[अम्लता]] (हाइड्रोजन ऑयन की सान्दता) का बढ़ जाना ...३८५ बाइट (४ शब्द) - ०८:२४, २७ मार्च २०२०
- ...ा को कन्जेस्टिव हार्ट फेल्यर (CHF) भी कहा जाता है। "कन्जेस्टिव" का अर्थ है शरीर में तरल पदार्थ की मात्रा बढ़ रही है, क्योंकि हृदय उचित तरीके से पम्पिंग नही [[श्रेणी:मानव शरीर]] ...१ KB (१ शब्द) - १९:३०, १९ जनवरी २०१७
- ...की सुरक्षा करती है। जब कोई रोगाणु, जैसे कि [[जीवाणु]], [[विषाणु]] इत्यादि शरीर में प्रवेश करते है, तो यह एक प्रकार के रसायन [[प्रतिपिंड|प्रतिपिण्ड]] का नि ...२ KB (१४ शब्द) - १८:०५, २० फ़रवरी २०२१
- ...भिप्राय किसी शरीर से एक स्वस्थ और कार्यशील [[अंग]] निकाल कर उसे किसी दूसरे शरीर के क्षतिग्रस्त या विफल अंग की जगह प्रत्यारोपित करने से है, (किसी रोगी के एक ...ै और इसके कारण प्रत्यारोपण विफल हो जाता है और अब इस प्रत्यारोपित अंग को उस शरीर में ही कार्यशील बनाए रखना प्रत्यारोपण औषधि के लिए एक बड़ी चुनौती होती है। य ...४ KB (१३ शब्द) - १८:३१, ३० दिसम्बर २०१८
- [[आमाशय (पेट)|आमाशय]] के अन्दर के पदार्थों को बलपूर्वक [[शरीर]] के बाहर निकालने की क्रिया को '''उल्टी''' या '''वमन''' (Vomiting) कहते हैं ...गैस्ट्रीक, [[विष|जहर]] या [[मस्तिष्क]] का ट्यूमर इत्यादि. अत्यधिक उल्टी से शरीर में [[जल]] की कमी जाती है; कभी कभी रोगी को शिराओं के माध्यम से जलीय घोल देन ...२ KB (५१ शब्द) - ०८:२७, १६ जून २०२०
- {{About|रासायनिक क्रिया|जैविक क्रिया|शरीर का निर्जलीकरण }} ...४१३ बाइट (३ शब्द) - ००:३७, २९ सितम्बर २०१८
- ...ों से लड़ने की क्षमता उत्पन्न करते हैं। दूसरे शब्दों में, कोई भी पदार्थ जो शरीर के [[प्रतिरक्षा प्रणाली|प्रतिरक्षा तंत्र]] को [[प्रतिपिंड|प्रतिपिण्ड]] (एन् ...२ KB (३५ शब्द) - २२:५६, २ मई २०२१
- ...र [[गुर्दा|गुर्दे]] से शुरु हो मूत्रवाहिनी से होकर मूत्राशय तक बहता है, और शरीर से मूत्रमार्ग के माध्यम से उत्सर्जित होता है। ...नों को बाहर निकालने की प्राथमिक विधि है। मूत्रविश्लेषन से किसी स्तनधारी के शरीर के निकले नाइट्रोजनयुक्त अपशिष्टों का पता लगाया सकता है। ...४ KB (१३ शब्द) - २१:५१, ३१ मई २०२०
- [[मधुमेह]] होने पर शरीर को भोजन से ऊर्जा प्राप्त करने में कठिनाई होती है। पेट फिर भी [[भोजन]] को [[ ...ें पर्याप्त ग्लूकोज न होने के कारण कोशिकाएं उतनी ऊर्जा नहीं बना पाती जिससे शरीर सुचारू रूप से चल सके। ...२ KB (२ शब्द) - १४:५५, ६ मार्च २०२०
- ...ी परिकल्पना भारतीय ज्योतिष में मिलती है जिसमें समस्त राशिचक्र को मनुष्य के शरीर के समतुल्य वर्णित किया जाता है। [[१२ राशियां]] के रूप में कालपुरुष के शरीर के [[अवयव]] इस प्रकार से हैं: ...४ KB (५७ शब्द) - १०:५३, १६ जून २०२०
- [[आयुर्विज्ञान|चिकित्सा विज्ञान]] के सन्दर्भ में शरीर के किसी गायब या क्षत्रिग्रस्त अंग के स्थान पर लगायी गयी कृत्रिम व्यवस्था को ...६०४ बाइट (१९ शब्द) - १४:४६, ४ मार्च २०२०