नैअड (उपग्रह)

नैअड सौर मण्डल के आठवे ग्रह वरुण का एक उपग्रह है। यह वरुण के सारे उपग्रहों में से उस से सबसे समीप परिक्रमा करने वाला उपग्रह है। नैअड का औसत व्यास ६६ किमी है और इसका अकार बेढंगा है (यानि गोल नहीं है)। इस उपग्रह का रंग गाढ़ा प्रतीत होता है। वैज्ञानिकों का अनुमान है के वरुण का यह चन्द्रमा वरुण के साथ-साथ निर्मित नहीं हुआ था, बल्कि उस मलबे के कुछ जमावड़े से बन गया है जब वरुण नें अपने से पास गुज़रते हुए ट्राइटन को अपने शक्तिशाली गुरुत्वाकर्षण के क़ब्ज़े में लेकर उसे अपना उपग्रह बना लिया। उस दौरान वरुण के इर्द-गिर्द घूम रहे पुराने उपग्रहों में गुरुत्वकर्षण के बदलते प्रभाव से काफ़ी टकराव हुए थे जिनसे वे उपग्रह ध्वस्त हो गए और अपना मलबा छोड़ गए और नैअड उसी का नतीजा है। ट्राइटन को छोड़कर, वरुण के अन्य उपग्रहों का निर्माण कुछ ऐसे ही हुआ था।[१]
वरुण के कुछ अन्य अंदरूनी चंद्रमाओं की तरह, नैअड भी धीरे-धीरे वरुण के समीप आता जा रहा है और वैज्ञानिकों का विचार है के कुछ समय बात यह या तो वरुण के वायुमंडल में गिरकर ध्वस्त हो जाएगा या वरुण की रोश सीमा के अन्दर आने से उसके गुरुत्वाकर्षण द्वारा तोड़कर एक उपग्रही छल्ले के लिए मलबा बन जाएगा। फ़िलहाल नैअड वरुण के वायुमंडल के ऊपरी बादलों से २३,५०० किमी ऊपर उस ग्रह की परिक्रमा कर रहा है।
अन्य भाषाओँ में[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]
नैअड को अंग्रेज़ी में "Naiad" कहते हैं।
इन्हें भी देखें[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]
सन्दर्भ[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]
- ↑ ""वरुण के अंदरूनी उपग्रहों का एक गत्यात्मक इतिहास (अ डाएनैमिकल हिस्टरी ऑफ़ द इन्नर नॅप्टयूनियन सैटलाइट्ज़, अंग्रेज़ी में)"". आइकैरस. ९९(२)
- ३९०.doi:10.1016/0019-1035(92)90155-Z.[१]Retrieved 20 मई 2011.