मुख
मुख (अंग्रेज़ी: Mouth) मनुष्य तथा अनेक अन्य प्राणियों के शरीर का वह शारीरिक अंग है, जिसके माध्यम से भोजन और जल शरीर में प्रवेश करते हैं। मनुष्य में मुख पाचन तंत्र का प्रारंभिक भाग है। यह भोजन ग्रहण करने, चबाने, निगलने, स्वाद पहचानने तथा वाणी उत्पन्न करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।[१]
मनुष्य के मुख में होंठ, गाल, दाँत, मसूड़े, जीभ, तालु और लार ग्रंथियों के स्राव के लिए खुलने वाले मार्ग शामिल होते हैं। मुखगुहा का भीतरी भाग श्लेष्म झिल्ली से ढका रहता है। मुख का पिछला भाग ग्रसनी से जुड़ता है, जहाँ से भोजन और वायु के मार्ग आगे विभाजित होते हैं।[२]
संरचना[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]
मनुष्य का मुख चेहरे के निचले भाग में स्थित होता है। इसका बाहरी प्रवेशद्वार होंठों से घिरा होता है और इसके भीतर मुखगुहा होती है। मुखगुहा को सामान्यतः दो भागों में बाँटा जाता है: मुख-प्रकोष्ठ और वास्तविक मुखगुहा।[२]
होंठ[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]
होंठ मुख का बाहरी प्रवेशद्वार बनाते हैं। ये मांसपेशियों, संयोजी ऊतक और त्वचा से निर्मित होते हैं तथा इनके भीतरी भाग पर श्लेष्म झिल्ली होती है। होंठ भोजन ग्रहण करने, बोलने, चेहरे के भाव व्यक्त करने और मुख को बंद रखने में सहायता करते हैं।[२]
गाल[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]
गाल मुखगुहा की पार्श्व दीवारों का निर्माण करते हैं। इनमें मुख्य रूप से बुक्सिनेटर पेशी होती है, जो भोजन को दाँतों की चबाने वाली सतह के बीच बनाए रखने में सहायता करती है।[२]
दाँत और मसूड़े[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]
दाँत जबड़ों में स्थित कठोर संरचनाएँ हैं। इनका प्रमुख कार्य भोजन को काटना, चीरना और पीसना है। मनुष्य के स्थायी दाँत सामान्यतः 32 होते हैं, जिनमें कृंतक, रदनक, अग्रचर्वणक और चर्वणक दाँत शामिल हैं।[३]
मसूड़े दाँतों के आधार के आसपास स्थित कोमल ऊतक हैं। वे दाँतों को सहारा देने वाली संरचनाओं को ढकते हैं और मुखगुहा की सुरक्षा में योगदान करते हैं।[४]
जीभ[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]
जीभ मुखगुहा के तल पर स्थित एक पेशीय अंग है। इसकी सतह पर अनेक स्वाद कलिकाएँ होती हैं, जिनकी सहायता से मनुष्य मीठा, खट्टा, नमकीन, कड़वा और उमामी जैसे स्वादों का अनुभव करता है। जीभ भोजन को मुख में इधर-उधर ले जाने, उसे लार के साथ मिलाने, निगलने तथा वाणी के उच्चारण में सहायता करती है।[५]
तालु[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]
तालु मुखगुहा की ऊपरी दीवार बनाता है। इसका अगला भाग कठोर तालु कहलाता है, जो अस्थि से समर्थित होता है, जबकि पिछला भाग कोमल तालु कहलाता है और मुख्यतः पेशीय ऊतकों से बना होता है। कोमल तालु निगलने के समय नासाग्रसनी को मुखग्रसनी से अलग करने में सहायता करता है।[२]
लार ग्रंथियाँ[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]
लार ग्रंथियाँ लार का निर्माण करती हैं। मनुष्य में तीन प्रमुख जोड़ी लार ग्रंथियाँ होती हैं: कर्णमूल ग्रंथि, अधोजंभ ग्रंथि और अधोजिह्वा ग्रंथि। इनके अतिरिक्त मुख की श्लेष्म झिल्ली में अनेक छोटी लार ग्रंथियाँ भी होती हैं।[६]
कार्य[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]
भोजन ग्रहण और चबाना[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]
मुख पाचन की प्रक्रिया का पहला चरण है। भोजन मुख में प्रवेश करने के बाद दाँतों द्वारा छोटे टुकड़ों में तोड़ा जाता है। जीभ और गाल भोजन को दाँतों के बीच व्यवस्थित रखने में सहायता करते हैं।[७]
लार और पाचन[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]
लार भोजन को नम और चिकना बनाती है, जिससे उसे चबाना और निगलना सरल होता है। लार में उपस्थित एंजाइम एमाइलेज स्टार्च के पाचन की शुरुआत करता है। लार मुखगुहा को नम रखने और दाँतों की सुरक्षा में भी योगदान देती है।[८]
निगलना[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]
चबाए गए भोजन और लार के मिश्रण को बोलस कहा जाता है। जीभ इसे मुख के पीछे की ओर धकेलती है, जहाँ से निगलने की प्रक्रिया आरंभ होती है। इसके बाद भोजन ग्रसनी और ग्रासनली से होकर आमाशय तक पहुँचता है।[७]
स्वाद और संवेदना[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]
जीभ की स्वाद कलिकाएँ भोजन में उपस्थित रासायनिक पदार्थों के प्रति प्रतिक्रिया करती हैं। स्वाद की अनुभूति में गंध की भी महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। मुख में स्पर्श, तापमान और दर्द का अनुभव कराने वाले संवेदी तंत्र भी उपस्थित होते हैं।[५]
वाणी[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]
मुख वाणी के निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जीभ, होंठ, दाँत और तालु वायु प्रवाह को नियंत्रित करके विभिन्न ध्वनियों के उच्चारण में सहायता करते हैं। वाणी का निर्माण केवल मुख तक सीमित नहीं है; इसमें स्वरयंत्र, श्वसन तंत्र और तंत्रिका तंत्र भी भाग लेते हैं।[९]
मुख का स्वास्थ्य[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]
मुख का स्वास्थ्य समग्र स्वास्थ्य का एक महत्त्वपूर्ण भाग है। दाँतों, मसूड़ों, जीभ और मुख की श्लेष्म झिल्ली का स्वस्थ रहना भोजन ग्रहण करने, बोलने और संक्रमण से बचाव के लिए आवश्यक है।[१०]
मुख के स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए नियमित रूप से दाँत साफ करना, दाँतों के बीच की जगहों की सफाई करना, संतुलित आहार लेना और आवश्यकतानुसार दंत चिकित्सक से जाँच कराना उपयोगी उपाय हैं।[११]
मुख से संबंधित सामान्य रोग और स्थितियाँ[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]
दंत क्षय[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]
दंत क्षय दाँतों की कठोर सतह को प्रभावित करने वाली एक सामान्य बीमारी है। मुख में उपस्थित जीवाणु शर्करा का उपयोग करके अम्ल उत्पन्न करते हैं, जो दाँतों के खनिजों को नुकसान पहुँचा सकते हैं।[१२]
मसूड़ों के रोग[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]
मसूड़ों के रोग मुख्यतः दाँतों पर जमा जीवाणुयुक्त पट्टिका के कारण होते हैं। प्रारंभिक अवस्था में मसूड़ों में सूजन और रक्तस्राव हो सकता है। गंभीर अवस्था में दाँतों को सहारा देने वाले ऊतकों और अस्थि को क्षति पहुँच सकती है।[४]
मुख के छाले[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]
मुख के छाले मुख की श्लेष्म झिल्ली पर बनने वाले छोटे घाव होते हैं। इनके विभिन्न कारण हो सकते हैं, जिनमें स्थानीय चोट, संक्रमण और कुछ अन्य स्वास्थ्य स्थितियाँ शामिल हैं।[१३]
मुख कैंसर[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]
मुख कैंसर मुख के विभिन्न भागों, जैसे होंठ, जीभ, मसूड़े और मुखगुहा की अन्य सतहों में विकसित हो सकता है। तंबाकू का सेवन और मद्यपान इसके प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं।[१४]
मुख शुष्कता[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]
मुख शुष्कता वह स्थिति है जिसमें लार का स्राव कम हो जाता है या मुख में पर्याप्त नमी नहीं रहती। इससे भोजन चबाने, निगलने और बोलने में कठिनाई हो सकती है तथा दंत क्षय का जोखिम बढ़ सकता है।[८]
अन्य प्राणियों में मुख[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]
मुख की संरचना और कार्य विभिन्न प्राणी समूहों में अलग-अलग होते हैं। कशेरुकी प्राणियों में मुख सामान्यतः भोजन ग्रहण करने और पाचन की शुरुआत करने का कार्य करता है, जबकि अकशेरुकी प्राणियों में भोजन ग्रहण करने के लिए विभिन्न प्रकार की संरचनाएँ विकसित हुई हैं।[१५]
कीटों में मुखांग भोजन के प्रकार के अनुसार काटने-चबाने, चूसने, छेदने या चाटने के लिए अनुकूलित हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, मच्छरों के मुखांग रक्त चूसने के लिए तथा तितलियों की लंबी सूँड़ पुष्परस ग्रहण करने के लिए अनुकूलित होती है।[१६]
यह भी देखें[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]
सन्दर्भ[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]
- ↑ । "The Mouth"। Endotext। National Center for Biotechnology Information। अभिगमन तिथि: 30 अक्टूबर 2026।
- ↑ २.० २.१ २.२ २.३ २.४ । "Anatomy, Head and Neck, Oral Cavity (Mouth)"। StatPearls। National Center for Biotechnology Information। अभिगमन तिथि: 30 अक्टूबर 2026।
- ↑ । "Children's Teeth"। National Institute of Dental and Craniofacial Research। National Institutes of Health। अभिगमन तिथि: 30 अक्टूबर 2026।
- ↑ ४.० ४.१ । "Gum Disease"। National Institute of Dental and Craniofacial Research। National Institutes of Health। अभिगमन तिथि: 30 अक्टूबर 2026।
- ↑ ५.० ५.१ । "Taste Disorders"। National Institute of Dental and Craniofacial Research। National Institutes of Health। अभिगमन तिथि: 30 अक्टूबर 2026।
- ↑ । "Anatomy, Head and Neck, Salivary Glands"। StatPearls। National Center for Biotechnology Information। अभिगमन तिथि: 30 अक्टूबर 2026।
- ↑ ७.० ७.१ । "Your Digestive System and How It Works"। National Institute of Diabetes and Digestive and Kidney Diseases। National Institutes of Health। अभिगमन तिथि: 30 अक्टूबर 2026।
- ↑ ८.० ८.१ । "Dry Mouth"। National Institute of Dental and Craniofacial Research। National Institutes of Health। अभिगमन तिथि: 30 अक्टूबर 2026।
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- ↑ । "Head and Neck Cancers"। National Cancer Institute। National Institutes of Health। अभिगमन तिथि: 30 अक्टूबर 2026।
- ↑ । "Digestive system"। Encyclopaedia Britannica। Encyclopaedia Britannica, Inc.। अभिगमन तिथि: 30 अक्टूबर 2026।
- ↑ । "Insect: Mouthparts"। Encyclopaedia Britannica। Encyclopaedia Britannica, Inc.। अभिगमन तिथि: 30 अक्टूबर 2026।